Bihar Board Class 10th Hindi (Varnika Bhag 2) Chapter 3 माँ (गुजराती)) Solutions

Here we have provided Solution for Chapter 3 माँ (गुजराती)) of Hindi (Varnika Bhag 2) subject for Class 10th students of Bihar Board of Secondary Education. There are various chapters in this Hindi (Varnika Bhag 2) such as Chapter 1 दही वाली मंगम्मा (कन्नड़)), Chapter 2 ढहते विश्वास (उड़िया)), Chapter 3 माँ (गुजराती)), Chapter 4 नगर (तमिल)) and Chapter 5 धरती कब तक घूमेगी (राजस्थानी)). Summary of the same is given below:

Board NameBihar Board of Secondary Education
ClassClass 10th
Content TypeSolution
Solution forClass 10th students
SubjectHindi (Varnika Bhag 2)
Chapter NameChapter 3 माँ (गुजराती))
Total Number of Chapter in this Subject5

Studying Bihar Board Class 10th Hindi (Varnika Bhag 2) Chapter 3 माँ (गुजराती)) solution will help you higher marks in this subject but you need to follow best practices to achieve higher marks, which are given after solutions, go through them once.

Bihar Board Class 10th Hindi (Varnika Bhag 2) Chapter 3 माँ (गुजराती)) Solutions

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बोध और अभ्यास प्रश्न 1. मंगु के प्रति मां और परिवार के अन्य सदस्यों के व्यवहार में जो फर्क है उसे अपने शब्दों में लिखें।

उत्तर-
माँ और परिवार के अन्य सदस्यों के व्यवहार में बहुत बड़ा अंतर है। माँ के लिए मंगु उसकी संतान है, चाहे वह जन्म से पागल और गूंगी क्यों न हो। माँ का सारा प्रेम और वात्सल्य मंगु पर ही केंद्रित है। वह रात-दिन उसकी सेवा में लगी रहती है, उसे नहलाती-खिलाती है और उसके मल-मूत्र तक को बिना किसी शिकायत के साफ करती है। माँ के लिए मंगु के बिना जीवन अधूरा है।

दूसरी ओर, परिवार के अन्य सदस्य जैसे माँ के दोनों बेटे, बहुएँ और पोते-पोतियाँ मंगु को एक बोझ की तरह देखते हैं। वे चाहते हैं कि मंगु को पागलखाने (अस्पताल) में भर्ती करा दिया जाए ताकि घर में सामान्य जीवन चल सके। उन्हें लगता है कि माँ ने सिर्फ मंगु के लिए ही जीना शुरू कर दिया है और बाकी सभी से उसका लगाव कम हो गया है। इस वजह से वे माँ से नाराज़ भी रहते हैं।

प्रश्न 2, माँ मंगु को अस्पताल में क्यों नहीं भर्ती कराना चाहती? विचार करें?

उत्तर-
माँ मंगु को अस्पताल में भर्ती नहीं कराना चाहती थी, क्योंकि उसके मन में अस्पताल के प्रति गहरा अविश्वास और डर था। वह अस्पताल को गौशाला (पशुओं के रहने की जगह) के समान समझती थी। उसे यह चिंता सताती थी कि अस्पताल में डॉक्टर-नर्स सिर्फ औपचारिकता पूरी करेंगे। मंगु खुद से खा-पी नहीं सकती थी और बिस्तर पर ही मल-मूत्र कर देती थी। माँ को डर था कि अस्पताल के कर्मचारी उसकी इस तरह की देखभाल नहीं करेंगे, उसके गीले कपड़े और बिस्तर नहीं बदलेंगे। माँ का विश्वास था कि सिर्फ वही अपनी बेटी की सही देखभाल कर सकती है, इसलिए वह उसे अपने से दूर नहीं करना चाहती थी।

प्रश्न 3. कसम के पागलपन में सुधार देख मंग के प्रति माँ परिवार और समाज की प्रतिक्रिया को अपने शब्दों में लिखें।

उत्तर-
कुसुम नामक एक पढ़ी-लिखी लड़की, जिसकी माँ नहीं थी, अचानक पागल हो गई। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया और डॉक्टरों की देखभाल में वह धीरे-धीरे ठीक होने लगी। जब कुसुम पूरी तरह ठीक होकर घर लौटी, तो माँ ने उससे मिलकर अस्पताल के प्रति अपनी सोच बदल ली।

इस घटना का माँ, परिवार और समाज पर यह प्रभाव पड़ा:

  1. माँ की प्रतिक्रिया: कुसुम को ठीक होते देख माँ का अस्पताल के प्रति विश्वास जगा। उसे लगा कि शायद अस्पताल में भर्ती होने से मंगु भी ठीक हो सकती है।
  2. परिवार की प्रतिक्रिया: परिवार के लोगों ने इस मौके का फायदा उठाते हुए माँ को फिर से समझाया कि एक बार मंगु को अस्पताल में भर्ती कराकर देख लेना चाहिए।
  3. समाज की प्रतिक्रिया: गाँव के लोगों ने भी माँ को समझाना शुरू कर दिया कि आधुनिक इलाज से फायदा हो सकता है। सबने मिलकर माँ को मंगु को अस्पताल ले जाने के लिए राजी किया।
इस तरह, कुसुम के ठीक होने ने सभी की सोच बदल दी और माँ ने आखिरकार मंगु को अस्पताल भर्ती कराने का फैसला लिया।

प्रश्न 4. कहानी के शीर्षक की सार्थकता पर विचार करें।

उत्तर-
इस कहानी का शीर्षक 'माँ' पूरी तरह से सार्थक और उचित है। कहानी का केंद्रीय विषय मातृत्व का असीम प्रेम और त्याग है, जो शीर्षक में ही स्पष्ट झलकता है।

  • पूरी कहानी माँ के इर्द-गिर्द ही घूमती है। माँ का चरित्र ही कहानी की धुरी है।
  • कहानी माँ के उस अद्भुत स्नेह और समर्पण को दिखाती है, जो अपनी पागल और गूंगी बेटी मंगु के प्रति है। वह अपना सारा सुख त्यागकर उसकी सेवा में लगी रहती है।
  • शीर्षक 'माँ' छोटा, सटीक और पूरे भाव को व्यक्त करने वाला है। यह शीर्षक पाठक को तुरंत बता देता है कि कहानी मातृत्व के गुणों - सेवा, त्याग, धैर्य और अटूट प्रेम के बारे में है।
  • अंत में, जब माँ मंगु को अस्पताल छोड़कर आती है तो वह स्वयं मंगु जैसा व्यवहार करने लगती है। यह दृश्य यह साबित करता है कि माँ और उसकी संतान का रिश्ता इतना गहरा होता है कि दूरी भी उसे अलग नहीं कर पाती। इसलिए, कहानी का शीर्षक पूरी तरह सार्थक और सफल है।

प्रश्न 5. मंगु जिस अस्पताल में भर्ती की जाती है, उस अस्पताल के कर्मचारी व्यवहार कुशल हैं या संवेदनशील? विचार करें।

उत्तर-
मंगु को जिस अस्पताल में भर्ती किया जाता है, वहाँ के कर्मचारी न सिर्फ व्यवहार कुशल हैं बल्कि गहरी संवेदनशीलता भी रखते हैं।

  • संवेदनशीलता: जब माँ मंगु को छोड़कर जाती है तो रोने लगती है। डॉक्टर, मेट्रन और नर्सें माँ के इस दर्द को देखकर भावुक हो जाते हैं। वे सोचते हैं कि एक पागल रोगी के लिए इतना प्रेम देने वाला स्वजन उन्होंने पहले कभी नहीं देखा। एक अधेड़ उम्र की नर्स माँ को दिलासा देती है और मंगु को अपनी बेटी की तरह देखने का वादा करती है। यह उनकी संवेदनशीलता को दिखाता है।
  • व्यवहार कुशलता: वे माँ को पूरे आदर के साथ समझाते हैं कि अस्पताल में मंगु की अच्छी देखभाल होगी। वे उसे विश्वास दिलाकर शांत करने की कोशिश करते हैं, जो उनके पेशेवर व्यवहार कुशलता को दर्शाता है।
इस प्रकार, अस्पताल के कर्मचारी केवल अपना कर्तव्य निभाने वाले लोग नहीं हैं, बल्कि उनमें मानवीय दया और भावनाओं को समझने की क्षमता भी है।

प्रश्न 6. माँ का चरित्र-चित्रण कीजिए।

उत्तर-

माँ का चरित्र चित्रण
इस कहानी की मुख्य पात्र 'माँ' का चरित्र बहुत ही प्रभावशाली और प्रेरणादायक है। उसके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
  1. अथक सेवा और त्याग: माँ अपनी पागल बेटी मंगु की पूरी देखभाल स्वयं करती है। वह उसे नहलाती, खिलाती और उसका मल-मूत्र साफ करती है, बिना किसी शिकायत या ऊब के।
  2. अटूट ममत्व: उसके लिए मंगु उसकी संतान है, चाहे वह कैसी भी हो। उसका सारा प्रेम और वात्सल्य मंगु पर केंद्रित है। वह मंगु के बिना अपने जीवन को अधूरा मानती है।
  3. सहनशीलता: जब परिवार के अन्य सदस्य उसकी आलोचना करते हैं या मंगु को अस्पताल भेजने की बात करते हैं, तो वह चुपचाप सुनती है और अपना पक्ष धैर्यपूर्वक रखती है।
  4. व्यवहार कुशल: वह जानती है कि उसकी बहुएँ उससे नाराज़ हैं, लेकिन वह परिवार की शांति बनाए रखने का प्रयास करती है।
  5. सीखने की क्षमता: शुरू में वह अस्पताल के विरोधी थी, लेकिन कुसुम के ठीक होने का उदाहरण देखकर वह अपनी सोच बदल लेती है और मंगु के भले के लिए उसे अस्पताल ले जाने को तैयार हो जाती है।
  6. गहरी संवेदनशीलता: मंगु से बिछड़ने का दर्द उससे सहा नहीं जाता और अंत में वह स्वयं मंगु जैसा व्यवहार करने लगती है, जो माँ-बेटी के गहरे जुड़ाव को दर्शाता है।
संक्षेप में, माँ का चरित्र मातृत्व की सर्वोच्च मिसाल है – जहाँ प्रेम, सेवा, त्याग और धैर्य का कोई अंत नहीं है।

प्रश्न 7.

कहानी का सारांश प्रस्तुत करें।

उत्तर-
यह कहानी गुजराती साहित्य के प्रसिद्ध लेखक ईश्वर पेटलीकर द्वारा रचित है। इसमें एक माँ के असीम वात्सल्य और त्याग का मार्मिक चित्रण है। माँ की एक बेटी मंगु है, जो जन्म से ही पागल और गूँगी है। माँ अपने जीवन का हर सुख त्यागकर, बड़े प्रेम और धैर्य से मंगु की देखभाल करती है। परिवार के अन्य सदस्यों के अस्पताल में भर्ती कराने के आग्रह के बावजूद, माँ को डर है कि अस्पताल में उसकी देखभाल ठीक से नहीं होगी। अंततः एक अन्य लड़की के ठीक होने के उदाहरण से प्रभावित होकर, वह मंगु को अस्पताल ले जाने के लिए तैयार होती है। अस्पताल जाते समय उसका हृदय टूट रहा होता है। मंगु को छोड़कर जब वह घर लौटती है, तो उसका मन विचलित रहता है। मंगु की याद उसे सताती है और अंततः वह स्वयं मंगु जैसा व्यवहार करने लगती है, यानी पागल हो जाती है। इस घटना से परिवार को माँ की ममता की गहराई का एहसास होता है। कहानी मातृत्व की पीड़ा, त्याग और अटूट बंधन को बहुत ही संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत करती है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न 1. सही विकल्प चुनें

प्रश्न 1.

माँ कहानी है .................. - (क) राजस्थानी
(ख) गुजराती
(ग) तमिल
(घ) उड़िया

उत्तर-
(ख) गुजराती

प्रश्न 2.

कहानी के रचनाकार हैं (क) साँवर दइया
(ख) श्री निवास
(ग) ईश्वर पेटलीकर
(घ) सुजाता

उत्तर-
(ग) ईश्वर पेटलीकर

प्रश्न 3.

मंगु जन्म से ही ............. है। (क) अंधी
(ख) बहरी
(ग) पागल
(घ) गूंगी

उत्तर-
(ग) पागल

प्रश्न 4.

माँ की संतानें थीं। (क) तीन
(ख) दो
(ग) पाँच
(घ) चार

उत्तर-
(घ) चार

प्रश्न 5.

मंगु को अस्पताल ले जाते समय माँ ................ थी। (क) प्रसन्न
(ख) उदास
(ग) पागल
(घ) उद्विग्न

उत्तर-
(घ) उद्विग्न

॥. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें

प्रश्न 1.

माँ कहानी के रचयिता ................ हैं।

उत्तर-
ईश्वर पेटलीकर

प्रश्न 2.

मंगु ................ से ही पागल है।

उत्तर-
जन्म

प्रश्न 3.

माँ! ................ कहानी है।

उत्तर-
गुजराती

प्रश्न 4.

माँ की ................ संतानें हैं।

उत्तर-
चार

प्रश्न 5.

मंगु गूंगी है पर ................ नहीं है।

उत्तर-
बहरी

प्रश्न 6.

पराई ................ ही कान छेदती है।

उत्तर-
माँ

प्रश्न 7.

पुत्र का ................ भी भर आया था।

उत्तर-
नैन

प्रश्न 8.

माँ को यह ................ असह्य हो गया।

उत्तर-
घाव

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.

मंगु कौन थी?

उत्तर-
मंगु कहानी की मुख्य पात्र थी, जो जन्म से ही पागल और गूँगी थी। वह माँ की सबसे छोटी बेटी थी।

प्रश्न 2.

मंगु की देख-रेख कौन और कैसे करता था?

उत्तर-
मंगु की देख-रेख उसकी माँ पूरी लगन और ममता से करती थी। वह उसे अपने पास सुलाती, हाथ से खाना खिलाती, नहलाती और उसके मल-मूत्र की सफाई तक स्वयं करती थी।

प्रश्न 3.

मंगु की माँ उसे अस्पताल में क्यों नहीं भर्ती कराना चाहती थी?

उत्तर-
मंगु की माँ को डर था कि अस्पताल के कर्मचारी उसकी तरह स्नेह और धैर्य से मंगु की देखभाल नहीं कर पाएँगे। उसे लगता था कि वहाँ मंगु को कष्ट होगा, इसलिए वह उसे अस्पताल भेजने के विरुद्ध थी।

प्रश्न 4.

अस्पताल में भर्ती कराकर आने के बाद मंगु के भाई ने क्या प्रण किया?

उत्तर-
अस्पताल से लौटने के बाद, मंगु के भाई ने यह प्रण किया कि अगर मंगु घर वापस आती है, तो वह स्वयं उसकी देखभाल करेगा। अगर उसकी पत्नी मंगु के मल-मूत्र की सफाई करने से मना करेगी, तो वह खुद यह काम करेगा।

प्रश्न 5.

मंगु को अस्पताल में भर्ती करा कर आने के बाद माँ की क्या दशा हुई?

उत्तर-
मंगु को अस्पताल छोड़कर आने के बाद माँ पूरी रात सिसकती रही। सुबह जब उसने मंगु जैसी ही चीखें मारनी शुरू कीं, तो लोगों ने देखा कि माँ स्वयं पागल हो गई थी। मंगु की याद और अलगाव ने उसकी मानसिक स्थिति को पूरी तरह बदल दिया।

प्रश्न 6.

ईश्वर पेटलीकर कौन हैं?

उत्तर-
ईश्वर पेटलीकर गुजराती भाषा के एक प्रसिद्ध और लोकप्रिय कथाकार (कहानी लेखक) हैं।

प्रश्न 7.

ईश्वर पेटलीकर के साहित्य की क्या विशेषता है?

उत्तर-
ईश्वर पेटलीकर के साहित्य में गुजरात के समाज, संस्कृति, पुराने और नए मूल्यों तथा दार्शनिक विचारों का सुंदर समावेश मिलता है। उनकी रचनाएँ पाठकों को एक नया स्वाद और अनुभव देती हैं।

प्रश्न 8.

मंगु की माँ उसे अस्पताल में भर्ती कराने को कैसे राजी हुई?

उत्तर-
गाँव की ही एक लड़की कुसुम का पागलपन अस्पताल के इलाज से ठीक हो गया था। इस उदाहरण और लोगों के समझाने-बुझाने के बाद माँ को विश्वास हुआ कि अस्पताल से मंगु को भी लाभ हो सकता है, इसलिए वह उसे भर्ती कराने के लिए राजी हुई।

प्रश्न 9.

मंगु को अस्पताल ले जाने के समय माँ की स्थिति कैसी थी?

उत्तर-
मंगु को अस्पताल ले जाने वाले दिन माँ बहुत ही उद्विग्न और दुखी थी। पिछली रात उसे नींद नहीं आई थी। घर से निकलते समय उसे ऐसा लग रहा था मानो पूरे ब्रह्मांड का बोझ उसके कंधों पर आ गया हो। उसकी आँखों से लगातार आँसू बह रहे थे।

माँ – लेखक परिचय

ईश्वर पेटलीकर गुजराती भाषा के एक लोकप्रिय कथाकार हैं। इनके कथा साहित्य में गुजरात का समय और समाज, नये-पुराने मूल्य, दर्शन और कला आदि रच-बसकर एक नई आस्वादकता के साथ उपस्थित होते हैं। 'खून की सगाई' इनकी प्रसिद्ध कहानी है और 'काला पानी' इनका लोकप्रिय उपन्यास है। साहित्य के अलावा श्री पेटलीकर सामाजिक-राजनीतिक जीवन में भी सक्रिय रहे हैं। इनकी दर्जनों पुस्तकें पुरस्कृत और बहुप्रशंसित हो चुकी हैं। यह कहानी गोपालदास नागर द्वारा संपादित एवं अनूदित कहानी संग्रह 'माँ' से साभार संकलित है।

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