Bihar Board Class 10th Social Science (हमारी अर्थव्यवस्था भाग 2) Chapter 3 मुद्रा, बचत एवं साख) Solutions
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Here we have provided Solution for Chapter 3 मुद्रा, बचत एवं साख) of Social Science (हमारी अर्थव्यवस्था भाग 2) subject for Class 10th students of Bihar Board of Secondary Education. There are various chapters in this Social Science (हमारी अर्थव्यवस्था भाग 2) such as Chapter 1 अर्थव्यवस्था एवं इसके विकास का इतिहास), Chapter 2 राज्य एवं राष्ट्र की आय), Chapter 3 मुद्रा, बचत एवं साख), Chapter 4 हमारी वित्तीय संस्थाएँ), Chapter 5 रोजगार एवं सेवाएँ), Chapter 6 वैश्वीकरण) and Chapter 7 उपभोक्ता जागरण एवं संरक्षण). Summary of the same is given below:
| Board Name | Bihar Board of Secondary Education |
| Class | Class 10th |
| Content Type | Solution |
| Solution for | Class 10th students |
| Subject | Social Science (हमारी अर्थव्यवस्था भाग 2) |
| Chapter Name | Chapter 3 मुद्रा, बचत एवं साख) |
| Total Number of Chapter in this Subject | 7 |
Studying Bihar Board Class 10th Social Science (हमारी अर्थव्यवस्था भाग 2) Chapter 3 मुद्रा, बचत एवं साख) solution will help you higher marks in this subject but you need to follow best practices to achieve higher marks, which are given after solutions, go through them once.
Bihar Board Class 10th Social Science (हमारी अर्थव्यवस्था भाग 2) Chapter 3 मुद्रा, बचत एवं साख) Solutions
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1. वस्तु विनिमय प्रणाली क्या है ? इसकी क्या कठिनाइयाँ हैं ?
वस्तु विनिमय प्रणाली वह पुरानी प्रणाली है जिसमें लोग सीधे एक वस्तु के बदले दूसरी वस्तु का आदान-प्रदान करते हैं, बिना किसी सामान्य माध्यम (जैसे पैसा) के। उदाहरण के लिए, एक किसान गेहूँ देकर एक बुनकर से कपड़ा ले सकता है।
इसकी प्रमुख कठिनाइयाँ निम्नलिखित हैं:
- आवश्यकताओं के दोहरे संयोग का अभाव: यह सबसे बड़ी समस्या है। इसके लिए जरूरी है कि दोनों पक्षों को एक-दूसरे की वस्तु की जरूरत हो और वे उसी समय विनिमय करना चाहें।
- मूल्य मापन में कठिनाई: वस्तुओं का सटीक मूल्य निर्धारित करना मुश्किल होता है। उदाहरण के लिए, एक बकरी के बदले कितने किलो गेहूँ मिलने चाहिए?
- वस्तुओं के विभाजन की समस्या: कई वस्तुएँ (जैसे गाय, बैल) को छोटे हिस्सों में बाँटकर विनिमय नहीं किया जा सकता।
- मूल्य संचय की असंभवता: कई वस्तुएँ समय के साथ खराब हो जाती हैं, इसलिए उन्हें लंबे समय तक बचाकर रखना और भविष्य में उपयोग करना मुश्किल होता है।
- दूर के व्यापार में असुविधा: भारी या नाशवान वस्तुओं को दूर ले जाना और उनका व्यापार करना बहुत कठिन और खर्चीला होता है।
2. मुद्रा के कार्यों का वर्णन करें।
मुद्रा आधुनिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और यह मुख्य रूप से निम्नलिखित कार्य करती है:
- विनिमय का माध्यम: यह मुद्रा का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है। मुद्रा ने वस्तु विनिमय की सभी कठिनाइयों को दूर कर दिया है। अब लोग अपनी वस्तु या सेवा बेचकर पैसा कमाते हैं और उस पैसे से अपनी जरूरत की कोई भी वस्तु या सेवा खरीद सकते हैं।
- मूल्य का मापक: मुद्रा सभी वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य को मापने का एक सामान्य पैमाना प्रदान करती है। इससे हम आसानी से तुलना कर सकते हैं कि एक वस्तु दूसरी से कितनी महँगी या सस्ती है।
- मूल्य का संचय: मुद्रा को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है क्योंकि यह खराब नहीं होती। लोग अपनी आय का एक हिस्सा बचाकर मुद्रा के रूप में जमा कर सकते हैं और भविष्य की जरूरतों या आपात स्थिति के लिए उपयोग कर सकते हैं।
- भविष्य में भुगतान का आधार: मुद्रा के कारण ही ऋण लेन-देन संभव हो पाता है। कोई व्यक्ति आज ऋण ले सकता है और भविष्य में एक निश्चित राशि वापस करने का वादा कर सकता है।
- मूल्य का हस्तांतरण: मुद्रा की सहायता से धन को एक स्थान से दूसरे स्थान पर आसानी से भेजा जा सकता है, जिससे दूर के व्यापार को बढ़ावा मिलता है।
3. बचत से आप क्या समझते हैं ? बचत के विभिन्न रूपों का वर्णन करें।
बचत का अर्थ है वर्तमान आय का वह हिस्सा जिसे हम भविष्य की जरूरतों के लिए खर्च न करके संग्रहित करते हैं। दूसरे शब्दों में, बचत = आय - उपभोग व्यय।
बचत के विभिन्न रूप निम्नलिखित हैं:
- नकद बचत: लोग अपनी बचत को नकद रूप में घर पर (जैसे तिजोरी, अलमारी में) रख सकते हैं। हालाँकि यह सुरक्षित नहीं है और इस पर कोई ब्याज भी नहीं मिलता।
- बैंक जमा: यह बचत का सबसे सुरक्षित और लोकप्रिय तरीका है। इसमें पैसा बचत खाता, सावधि जमा (FD), या आवर्ती जमा (RD) में जमा किया जाता है। बैंक इस पर ब्याज देते हैं और पैसा सुरक्षित रहता है।
- डाकघर बचत: डाकघर भी बचत के विभिन्न साधन प्रदान करते हैं, जैसे डाकघर बचत खाता, राष्ट्रीय बचत पत्र (NSC), सार्वजनिक भविष्य निधि (PPF) आदि। ये सुरक्षित और विश्वसनीय माने जाते हैं।
- बीमा पॉलिसी: जीवन बीमा या सामान्य बीमा भी बचत का एक रूप है। नियमित प्रीमियम भरने से भविष्य में वित्तीय सुरक्षा मिलती है और कुछ पॉलिसियों में बचत का लाभ भी मिलता है।
- प्रतिभूतियों में निवेश: शेयर बाजार में शेयर, डिबेंचर या म्यूचुअल फंड में निवेश करना। इसमें जोखिम अधिक होता है, लेकिन रिटर्न (लाभ) भी अधिक मिलने की संभावना रहती है।
- वस्तु के रूप में बचत: कुछ लोग सोना-चाँदी, जमीन, मकान आदि में अपनी बचत को निवेशित कर देते हैं। इन वस्तुओं के मूल्य में समय के साथ वृद्धि होने की संभावना रहती है।
4. साख से आप क्या समझते हैं ? साख के विभिन्न स्रोतों का वर्णन करें।
साख (Credit) का अर्थ है "उधार" या "ऋण"। जब एक व्यक्ति या संस्था दूसरे को धन, वस्तु या सेवा प्रदान करती है और उसके बदले में भविष्य में भुगतान प्राप्त करने का विश्वास (वादा) रखती है, तो इसे साख कहते हैं। साख देने वाला "ऋणदाता" और लेने वाला "ऋणी" कहलाता है।
साख के प्रमुख स्रोत निम्नलिखित हैं:
- व्यावसायिक बैंक: ये साख का सबसे बड़ा और औपचारिक स्रोत हैं। बैंक जनता से जमा स्वीकार करते हैं और उस पैसे को विभिन्न प्रकार के ऋण (कृषि ऋण, व्यापार ऋण, शिक्षा ऋण, गृह ऋण आदि) के रूप में लोगों को उपलब्ध कराते हैं।
- सहकारी समितियाँ: ग्रामीण क्षेत्रों में किसान और छोटे उत्पादक सहकारी समितियों के सदस्य बनकर सस्ती दर पर ऋण प्राप्त कर सकते हैं।
- क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRB): इनका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों, छोटे किसानों, कृषि मजदूरों, लघु उद्योगों आदि को बैंकिंग सुविधा और साख उपलब्ध कराना है।
- गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियाँ (NBFC): ये कंपनियाँ बैंकों की तरह जमा स्वीकार नहीं कर सकतीं, लेकिन ऋण देने और अन्य वित्तीय सेवाएँ प्रदान करने का काम करती हैं।
- मित्र व रिश्तेदार: यह अनौपचारिक स्रोत है। लोग अपनी जरूरत के लिए अक्सर परिवार के सदस्यों, मित्रों या रिश्तेदारों से बिना ब्याज या कम ब्याज पर उधार लेते हैं।
- साहूकार: यह भी एक अनौपचारिक स्रोत है। साहूकार बहुत ऊँची ब्याज दर पर ऋण देते हैं, जिससे कई बार ऋणी कर्ज के जाल में फँस जाते हैं।
- व्यापारिक साख: जब एक व्यापारी दूसरे व्यापारी को माल उधार पर देता है और भविष्य में भुगतान लेता है, तो इसे व्यापारिक साख कहते हैं।
5. बैंक जमा के विभिन्न प्रकारों का वर्णन करें।
बैंक जनता से विभिन्न प्रकार के जमा स्वीकार करते हैं, जिनकी विशेषताएँ और उद्देश्य अलग-अलग होते हैं। प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं:
- बचत खाता जमा: यह सामान्य लोगों के लिए है जो अपनी छोटी-छोटी बचत को सुरक्षित रखना चाहते हैं। इस खाते से पैसे निकाले जा सकते हैं और जमा किए जा सकते हैं। इस पर बैंक एक निश्चित दर से ब्याज देता है। इसमें न्यूनतम शेष राशि बनाए रखने की शर्त हो सकती है।
- चालू खाता जमा: यह खाता मुख्य रूप से व्यापारियों और व्यवसायियों के लिए होता है। इस खाते पर कोई ब्याज नहीं मिलता, लेकिन इसमें जितनी बार चाहें उतनी बार जमा और निकासी की सुविधा होती है। चेक बुक और ओवरड्राफ्ट की सुविधा भी मिलती है।
- सावधि जमा (Fixed Deposit - FD): इसमें एक निश्चित राशि को एक निश्चित अवधि (जैसे 6 महीने, 1 साल, 5 साल) के लिए जमा किया जाता है। इस अवधि के दौरान पैसा नहीं निकाला जा सकता। अवधि जितनी लंबी होगी, ब्याज दर उतनी ही अधिक मिलेगी। यह भविष्य के लिए बचत का एक सुरक्षित तरीका है।
- आवर्ती जमा (Recurring Deposit - RD): यह उन लोगों के लिए उपयुक्त है जो हर महीने एक निश्चित राशि बचा सकते हैं। हर महीने एक समान राशि जमा की जाती है और एक निश्चित अवधि के बाद जमा राशि और ब्याज सहित पूरी रकम वापस मिल जाती है।
6. बहुविकल्पीय प्रश्न
(क) वस्तु विनिमय प्रणाली में कठिनाई होती है-
स्पष्टीकरण: वस्तु विनिमय प्रणाली में आवश्यकताओं के दोहरे संयोग का अभाव, मूल्य मापन में कठिनाई और वस्तुओं के संग्रहण (विभाजन व संरक्षण) की समस्या – तीनों ही मुख्य कठिनाइयाँ थीं। इसलिए सही उत्तर (D) उपर्युक्त सभी की है।
(ख) मुद्रा का प्राथमिक कार्य है-
स्पष्टीकरण: मुद्रा का सबसे पहला और मुख्य कार्य विनिमय के माध्यम के रूप में कार्य करना है, क्योंकि इसी ने वस्तु विनिमय की समस्याओं को हल किया। अन्य कार्य महत्वपूर्ण हैं, लेकिन द्वितीयक हैं।
(ग) साख का औपचारिक स्रोत है-
स्पष्टीकरण: व्यावसायिक बैंक साख का एक प्रमुख औपचारिक स्रोत है क्योंकि यह सरकारी नियमों के अंतर्गत पंजीकृत और विनियमित होता है। साहूकार, मित्र और रिश्तेदार अनौपचारिक स्रोत हैं।
(घ) बैंक जमा का प्रकार नहीं है-
स्पष्टीकरण: बैंक जमा के मुख्य प्रकार हैं: बचत जमा, चालू जमा, सावधि जमा और आवर्ती जमा। 'प्रतिभूति जमा' बैंक जमा का एक प्रकार नहीं है; प्रतिभूतियाँ (शेयर, डिबेंचर) अलग वित्तीय साधन हैं।
(ङ) बचत को प्रभावित करने वाला कारक है-
स्पष्टीकरण: बचत कई कारकों से प्रभावित होती है। आय का स्तर जितना ऊँचा होगा, बचत की संभावना उतनी ही अधिक होगी। ब्याज दरें ऊँची होंगी तो लोग अधिक बचत करने के लिए प्रोत्साहित होंगे। साथ ही, भविष्य की आवश्यकताओं (जैसे शिक्षा, विवाह, बीमारी) के बारे में सोचकर भी लोग बचत करते हैं।
1. बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न (क) मुद्रा का प्राथमिक कार्य क्या है ?
(A) मूल्य का संचय
(B) विनिमय का माध्यम
(C) मूल्य का हस्तांतरण
(D) साख का आधार
उत्तर: (B) विनिमय का माध्यम
व्याख्या: मुद्रा का सबसे महत्वपूर्ण और प्राथमिक कार्य विनिमय का माध्यम होना है। इसके कारण वस्तु विनिमय प्रणाली की कठिनाइयाँ दूर होती हैं और लेन-देन आसानी से हो पाता है।
2. निम्नलिखित में से कौन-सा मुद्रा का कार्य नहीं है ?
(A) मूल्य का मापक
(B) भविष्य में भुगतान का आधार
(C) उत्पादन का साधन
(D) मूल्य का संचय
उत्तर: (C) उत्पादन का साधन
व्याख्या: मुद्रा के प्रमुख कार्य हैं – विनिमय का माध्यम, मूल्य का मापक, भविष्य में भुगतान का आधार और मूल्य का संचय। उत्पादन का साधन भूमि, श्रम, पूँजी और उद्यमी होते हैं, मुद्रा नहीं।
3. मुद्रा के कार्य हैं-
(A) विनिमय का माध्यम
(B) मूल्य का मापक
(C) (A) और (B) दोनों
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (C) (A) और (B) दोनों
व्याख्या: मुद्रा के दो प्रमुख प्राथमिक कार्य हैं – विनिमय का माध्यम और मूल्य का मापक। इनके अलावा इसके गौण कार्य भी हैं जैसे मूल्य का संचय और भविष्य में भुगतान का आधार।
4. मुद्रा के गौण कार्य हैं-
(A) मूल्य का हस्तांतरण
(B) मूल्य का संचय
(C) (A) और (B) दोनों
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (C) (A) और (B) दोनों
व्याख्या: मुद्रा के गौण या सहायक कार्यों में मूल्य का हस्तांतरण (जैसे एक स्थान से दूसरे स्थान पर पैसा भेजना) और मूल्य का संचय (बचत के रूप में रखना) शामिल हैं।
5. वस्तु विनिमय प्रणाली की कठिनाइयाँ हैं-
(A) आवश्यकताओं के दोहरे संयोग का अभाव
(B) मूल्य के सामान्य मापक का अभाव
(C) (A) और (B) दोनों
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (C) (A) और (B) दोनों
व्याख्या: वस्तु विनिमय प्रणाली में सबसे बड़ी कठिनाई यह थी कि दो व्यक्तियों के पास ऐसी वस्तुएँ होनी चाहिए जो एक-दूसरे को चाहिए और दोनों उनका आदान-प्रदान करने को तैयार हों। इसे 'आवश्यकताओं के दोहरे संयोग का अभाव' कहते हैं। साथ ही, वस्तुओं के मूल्य का कोई सामान्य मापक नहीं था।
6. मुद्रा के रूप में स्वीकार्यता का गुण होना चाहिए-
(A) सभी लोगों द्वारा
(B) कुछ लोगों द्वारा
(C) सरकार द्वारा
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (A) सभी लोगों द्वारा
व्याख्या: मुद्रा का सबसे जरूरी गुण सार्वभौमिक स्वीकार्यता है। यानी देश के सभी लोग उसे विनिमय के माध्यम के रूप में लेने और देने के लिए तैयार हों। इसी गुण के कारण मुद्रा काम कर पाती है।
7. मुद्रा का आविष्कार किस कठिनाई को दूर करने के लिए हुआ ?
(A) आवश्यकताओं के दोहरे संयोग की कठिनाई
(B) साख की कठिनाई
(C) ऋण की कठिनाई
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (A) आवश्यकताओं के दोहरे संयोग की कठिनाई
व्याख्या: मुद्रा का आविष्कार मुख्य रूप से वस्तु विनिमय प्रणाली की सबसे बड़ी कमी, यानी 'आवश्यकताओं के दोहरे संयोग' की समस्या को दूर करने के लिए हुआ। मुद्रा के आने से किसी भी वस्तु या सेवा का मूल्य मुद्रा में मापा और उसके बदले में भुगतान किया जाने लगा।
8. मुद्रा का कौन-सा रूप सबसे अधिक प्रचलित है ?
(A) सिक्के
(B) करेंसी नोट
(C) बैंक जमा
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (B) करेंसी नोट
व्याख्या: वर्तमान समय में मुद्रा का सबसे अधिक प्रचलित और सुविधाजनक रूप करेंसी नोट (कागजी मुद्रा) है। इसे केंद्रीय बैंक (भारत में भारतीय रिजर्व बैंक) जारी करता है और यह कानूनी मान्यता प्राप्त होती है।
9. बैंक जमा को मुद्रा क्यों माना जाता है ?
(A) क्योंकि यह विनिमय का माध्यम है
(B) क्योंकि यह मूल्य का संचय है
(C) (A) और (B) दोनों
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (C) (A) और (B) दोनों
व्याख्या: बैंक जमा (चेक, ड्राफ्ट, डेबिट कार्ड आदि के माध्यम से) को मुद्रा माना जाता है क्योंकि इसके द्वारा भुगतान किया जा सकता है, यानी यह विनिमय का माध्यम है। साथ ही, यह मूल्य के संचय का भी काम करता है क्योंकि पैसा बैंक में सुरक्षित रहता है।
10. बचत से क्या तात्पर्य है ?
(A) आय का वह भाग जो उपभोग पर खर्च नहीं किया जाता
(B) आय का वह भाग जो उपभोग पर खर्च किया जाता है
(C) आय का वह भाग जो उधार लिया जाता है
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (A) आय का वह भाग जो उपभोग पर खर्च नहीं किया जाता
व्याख्या: बचत का मतलब है किसी व्यक्ति, परिवार या देश की कुल आय का वह हिस्सा जो वर्तमान जरूरतों और उपभोग पर खर्च नहीं किया जाता, बल्कि भविष्य के लिए रख लिया जाता है। यह आर्थिक सुरक्षा और निवेश का आधार होती है।
11. बचत के प्रमुख साधन हैं-
(A) बैंक जमा
(B) बीमा
(C) (A) और (B) दोनों
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (C) (A) और (B) दोनों
व्याख्या: बचत के दो सुरक्षित और प्रमुख साधन बैंक जमा (बचत खाता, सावधि जमा आदि) और बीमा (जीवन बीमा, स्वास्थ्य बीमा आदि) हैं। ये न केवल बचत को सुरक्षित रखते हैं बल्कि उस पर ब्याज या अन्य लाभ भी देते हैं।
12. साख से क्या तात्पर्य है ?
(A) वस्तुओं का आदान-प्रदान
(B) धन का उधार लेना और देना
(C) मुद्रा का संचय
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (B) धन का उधार लेना और देना
व्याख्या: साख का अर्थ है विश्वास पर आधारित उधार लेन-देन। जब एक व्यक्ति या संस्था दूसरे को विश्वास करके धन, वस्तु या सेवा उधार देती है और भविष्य में उसे वापस पाने की उम्मीद रखती है, तो इसे साख कहते हैं।
13. साख के प्रमुख स्रोत हैं-
(A) साहूकार
(B) बैंक
(C) (A) और (B) दोनों
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (C) (A) और (B) दोनों
व्याख्या: साख के दो प्रमुख स्रोत हैं – औपचारिक स्रोत (जैसे बैंक, सहकारी समितियाँ) और अनौपचारिक स्रोत (जैसे साहूकार, रिश्तेदार, दोस्त)। बैंक साख का सबसे व्यवस्थित और सुरक्षित स्रोत है।
14. बैंक जनता से जमा स्वीकार करते हैं और उधार देते हैं, क्योंकि-
(A) बैंक लाभ कमाना चाहते हैं
(B) बैंक सामाजिक कल्याण करना चाहते हैं
(C) (A) और (B) दोनों
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (A) बैंक लाभ कमाना चाहते हैं
व्याख्या: बैंक एक व्यावसायिक संस्था है। वह जनता से जमा राशि पर कम ब्याज देता है और उधार लेने वालों से अधिक ब्याज वसूलता है। इन दोनों ब्याज दरों के अंतर से बैंक अपना लाभ कमाता है, यही उसका मुख्य उद्देश्य होता है।
15. किसानों को साख की आवश्यकता होती है-
(A) बीज, खाद, कीटनाशक खरीदने के लिए
(B) कृषि यंत्र खरीदने के लिए
(C) (A) और (B) दोनों
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (C) (A) और (B) दोनों
व्याख्या: किसानों को फसल उगाने से पहले बीज, खाद, कीटनाशक जैसी चीजें खरीदने के लिए पैसों की जरूरत होती है। साथ ही, आधुनिक खेती के लिए ट्रैक्टर, पंपसेट जैसे यंत्र खरीदने के लिए भी साख की आवश्यकता पड़ती है।
II. लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. मुद्रा क्या है ? इसके कार्यों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
मुद्रा क्या है? मुद्रा वह वस्तु है जिसे सामान्य रूप से विनिमय के माध्यम, मूल्य के मापक और भुगतान के साधन के रूप में सभी लोग स्वीकार करते हैं। आजकल कागज के नोट और सिक्के मुद्रा के प्रमुख रूप हैं।
मुद्रा के कार्य:
1. प्राथमिक कार्य:
a) विनिमय का माध्यम: यह मुद्रा का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है। इसके कारण वस्तु विनिमय की कठिनाइयाँ दूर हो गई हैं।
b) मूल्य का मापक: मुद्रा सभी वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य को मापने का एक सामान्य पैमाना है।
2. गौण कार्य:
a) मूल्य का संचय: मुद्रा को भविष्य के उपयोग के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है क्योंकि इसका मूल्य लंबे समय तक बना रहता है।
b) मूल्य का हस्तांतरण: मुद्रा के रूप में धन एक स्थान से दूसरे स्थान पर आसानी से भेजा जा सकता है।
c) भविष्य में भुगतान का आधार: उधार लेन-देन और भविष्य के भुगतान मुद्रा में तय किए जा सकते हैं।
प्रश्न 2. वस्तु विनिमय प्रणाली क्या है ? इसकी कठिनाइयाँ बताइए।
उत्तर:
वस्तु विनिमय प्रणाली: वस्तु विनिमय प्रणाली वह पुरानी व्यवस्था है जिसमें मुद्रा के बिना, एक वस्तु के सीधे दूसरी वस्तु से आदान-प्रदान द्वारा लेन-देन किया जाता था। उदाहरण के लिए, गेहूँ के बदले कपड़ा लेना।
वस्तु विनिमय प्रणाली की कठिनाइयाँ:
1. आवश्यकताओं के दोहरे संयोग का अभाव: यह सबसे बड़ी कठिनाई थी। इसके लिए दो व्यक्तियों के पास ऐसी वस्तुएँ होनी चाहिए थीं जो एक-दूसरे को चाहिए हों और दोनों उनका आदान-प्रदान करने को राजी हों।
2. मूल्य के सामान्य मापक का अभाव: हर वस्तु का मूल्य दूसरी वस्तु में नापना मुश्किल था। यह तय करना कठिन था कि एक बोरी गेहूँ के बदले कितना कपड़ा मिलेगा।
3. वस्तुओं के विभाजन की समस्या: बड़ी या अविभाज्य वस्तुओं (जैसे गाय, जमीन) का छोटे हिस्सों में आदान-प्रदान करना संभव नहीं था।
4. मूल्य संचय की कठिनाई: कई वस्तुएँ (जैसे अनाज, फल) लंबे समय तक सुरक्षित नहीं रखी जा सकती थीं, इसलिए भविष्य के लिए बचत करना मुश्किल था।
5. भविष्य में भुगतान की समस्या: उधार लेने और देने में यह तय करना कठिन था कि भविष्य में किस वस्तु के रूप में भुगतान किया जाएगा।
प्रश्न 3. बचत से आप क्या समझते हैं ? बचत के विभिन्न साधनों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
बचत का अर्थ: बचत का अर्थ है आय का वह भाग जो वर्तमान उपभोग पर खर्च नहीं किया जाता, बल्कि भविष्य की जरूरतों, आपात स्थितियों या निवेश के लिए रख लिया जाता है। सरल शब्दों में, बचत = आय - उपभोग व्यय।
बचत के साधन: बचत के प्रमुख साधन निम्नलिखित हैं –
1. बैंक जमा: यह सबसे सुरक्षित और लोकप्रिय साधन है। इसमें बचत खाता, सावधि जमा (FD), आवर्ती जमा (RD) आदि शामिल हैं।
2. डाकघर बचत योजनाएँ: डाकघर भी बचत खाते, राष्ट्रीय बचत पत्र, सावधि जमा आदि योजनाएँ चलाता है।
3. बीमा: जीवन बीमा और सामान्य बीमा (स्वास्थ्य, वाहन आदि) न केवल सुरक्षा प्रदान करते हैं बल्कि बचत का भी अच्छा साधन हैं।
4. प्रॉविडेंट फंड (PF): नौकरीपेशा लोगों के लिए यह एक अनिवार्य और सुरक्षित बचत का रास्ता है।
5. म्यूचुअल फंड: ये पेशेवर प्रबंधन के तहत शेयर बाजार में निवेश करते हैं और अधिक रिटर्न की संभावना रखते हैं, लेकिन इसमें जोखिम भी होता है।
6. शेयर/डिबेंचर: कंपनियों के शेयर या डिबेंचर खरीदकर भी बचत को निवेश किया जा सकता है।
7. सोना/चाँदी: भारत में सोना और चाँदी खरीदना बचत और निवेश का पारंपरिक तरीका है।
8. भवन निर्माण समितियाँ: ये समितियाँ भी छोटी-छोटी मासिक किश्तों पर बचत और ऋण की सुविधा देती हैं।
प्रश्न 4. साख से आप क्या समझते हैं ? साख के स्रोतों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
साख का अर्थ: साख का शाब्दिक अर्थ है 'विश्वास'। अर्थशास्त्र में, साख का अर्थ है किसी व्यक्ति या संस्था की वह क्षमता जिसके आधार पर वह दूसरों से धन, वस्तु या सेवा उधार ले सकता है, इस विश्वास पर कि भविष्य में उसे वापस कर दिया जाएगा। साख उधार लेने और देने की प्रक्रिया है।
साख के स्रोत: साख के स्रोतों को दो मुख्य वर्गों में बाँटा जा सकता है –
1. औपचारिक साख के स्रोत: ये संगठित और सरकार द्वारा नियमित किए जाते हैं।
a) वाणिज्यिक बैंक: साख का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण स्रोत।
b) सहकारी बैंक/समितियाँ: विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों और किसानों के लिए साख उपलब्ध कराती हैं।
c) क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRB): ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधा और साख पहुँचाने के लिए।
d) लघु वित्त बैंक: छोटे व्यवसायियों और निम्न आय वर्ग के लोगों को साख देते हैं।
2. अनौपचारिक साख के स्रोत: ये असंगठित और अक्सर नियमों से बाहर होते हैं।
a) साहूकार: पारंपरिक स्रोत है, लेकिन इनसे ब्याज दर बहुत अधिक होती है।
b) व्यापारी: किसानों को फसल बोने के लिए उधार देते हैं और फसल कटने पर वसूलते हैं।
c) मित्र एवं रिश्तेदार: बिना ब्याज या कम ब्याज पर साख देते हैं, लेकिन यह सीमित होता है।
d) भूमि-स्वामी (जमींदार): किसानों को बीज, खाद आदि के लिए उधार देते हैं।
प्रश्न 5. बैंक क्या है ? इसके कार्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
बैंक क्या है? बैंक एक ऐसी वित्तीय संस्था है जो जनता से जमा राशि स्वीकार करती है, उसे सुरक्षित रखती है और जरूरतमंद लोगों व व्यवसायों को ऋण (साख) प्रदान करती है। बैंक लाभ कमाने वाली व्यावसायिक संस्था होती है।
बैंक के प्रमुख कार्य:
1. जमा स्वीकार करना: यह बैंक का प्राथमिक कार्य है। बैंक लोगों से विभिन्न प्रकार के खातों के माध्यम से पैसा जमा कराता है, जैसे –
a) बचत खाता: छोटी बचत के लिए, कम ब्याज मिलता है।
b) चालू खाता: व्यवसायियों के लिए, ब्याज नहीं मिलता, लेकिन अनलिमिटेड चेक निकासी की सुविधा होती है।
c) सावधि जमा खाता: एक निश्चित अवधि के लिए जमा, इस पर अधिक ब्याज मिलता है।
2. ऋण देना (साख सृजन): बैंक जमा राशि का एक हिस्सा विभिन्न प्रकार के ऋण देकर उपयोग करता है, जैसे –
a) नकद ऋण: एक सीमा तक नकद निकालने की सुविधा।
b) अधिविकर्ष: चालू खाते में जमा से अधिक राशि निकालने की सुविधा।
c) ऋण (लोन): कार, घर, शिक्षा, व्यवसाय आदि के लिए बड़ी रकम का ऋण।
3. एजेंसी के कार्य: बैंक अपने ग्राहकों के एजेंट के रूप में भी काम करता है, जैसे –
a) चेक, ड्राफ्ट, पे-ऑर्डर आदि के माध्यम से भुगतान करना और प्राप्त करना।
b) विभिन्न प्रकार के बिल (बिजली, पानी, टैक्स) का भुगतान करना।
c) शेयर, डिबेंचर आदि की खरीद-बिक्री करना।
d) लॉकर की सुविधा प्रदान करना।
4. सामान्य उपयोगी सेवाएँ:
a) विदेशी मुद्रा का लेन-देन।
b) एटीएम, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग की सुविधा।
c) बैंक गारंटी देना।
III. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. मुद्रा के विभिन्न रूपों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
समय के साथ मुद्रा के रूप में विभिन्न वस्तुओं का उपयोग हुआ है। आज मुद्रा के मुख्य रूप निम्नलिखित हैं –
1. वस्तु मुद्रा: प्राचीन काल में विनिमय के लिए ऐसी वस्तुओं का उपयोग होता था जिनका अपना उपयोगी मूल्य होता था, जैसे – अनाज, मवेशी, शंख, नमक, धातु के टुकड़े आदि। इनमें से कई वस्तुएँ टिकाऊ नहीं थीं और विभाजन में कठिनाई थी।
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How to download Bihar Board Class 10th Social Science (हमारी अर्थव्यवस्था भाग 2) Chapter 3 मुद्रा, बचत एवं साख) Solutions
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