Bihar Board Class 10th Hindi (Godhuli Bhag 2 पद्य खण्ड) Chapter 11 लौटकर आऊँग फिर) Solutions
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| Board Name | Bihar Board of Secondary Education |
| Class | Class 10th |
| Content Type | Solution |
| Solution for | Class 10th students |
| Subject | Hindi (Godhuli Bhag 2 पद्य खण्ड) |
| Chapter Name | Chapter 11 लौटकर आऊँग फिर) |
| Total Number of Chapter in this Subject | 12 |
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Bihar Board Class 10th Hindi (Godhuli Bhag 2 पद्य खण्ड) Chapter 11 लौटकर आऊँग फिर) Solutions
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प्रश्न 1. कवि किस तरह के बंगाल में एक दिन लौटकर आने की बात करता है?
कवि उस सुंदर और प्राकृतिक समृद्धि से भरे बंगाल में लौटकर आने की बात करता है जहाँ हरे-भरे धान के खेत लहलहाते हैं, नदियाँ बहती हैं और धान के पौधों पर कोहरे की चादर छाई रहती है। वह उस बंगाल की बात करता है जहाँ कटहल के पेड़ों की ठंडी छाया है, घास के हरे-भरे मैदान हैं और कपास के पेड़ खिले हुए हैं। जंगलों में पक्षियों की मधुर आवाज़ें गूँजती हैं और सारस पक्षी की सुंदर छवि दिखाई देती है। कवि इसी रमणीय और मनोहर धरती पर फिर से जन्म लेकर आना चाहता है।
प्रश्न 2. कवि अगले जीवन में क्या-क्या बनने की संभावना व्यक्त करता है और क्यों ?
कवि अपनी मातृभूमि बंगाल के प्रति गहरे प्रेम के कारण अगले जन्म में किसी भी रूप में वहाँ लौटना चाहता है। वह चिड़िया, कौआ, हंस, उल्लू या सारस बनकर भी बंगाल की इस धरती पर आने को तैयार है। उसका मानना है कि भले ही उसका शरीर और रूप बदल जाए, लेकिन उसे अपनी प्रिय मातृभूमि के प्राकृतिक सौंदर्य के बीच रहने का अवसर ज़रूर मिलेगा। यही कारण है कि वह किसी भी जीव के रूप में जन्म लेने की इच्छा रखता है।
प्रश्न 3. अगले जन्मों में बंगाल में आने की क्या सिर्फ कवि की इच्छा है ? स्पष्ट कीजिए।
नहीं, अगले जन्म में बंगाल आने की इच्छा केवल कवि की व्यक्तिगत भावना नहीं है। यह इच्छा उन सभी लोगों की प्रतिनिधि है जो अपनी मातृभूमि से गहरा लगाव और प्रेम रखते हैं। कवि इस कविता के माध्यम से बंगाल के प्रति अपने उमड़ते हुए प्रेम को व्यक्त करते हुए, उन सभी देशप्रेमियों और मातृभूमि से जुड़े लोगों की भावनाओं को भी आवाज़ दे रहा है जो अपनी जन्मभूमि से कभी अलग नहीं होना चाहते।
प्रश्न 4. कवि किनके बीच अंधेरे में होने की बात करता है ? आशय स्पष्ट कीजिए।
कवि सारस पक्षियों के झुंड के बीच संध्या के अंधेरे में होने की बात करता है। बंगाल के प्राकृतिक वातावरण में सारस एक सुंदर पक्षी है जो लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है। शाम के समय जब अंधेरा धीरे-धीरे फैलने लगता है, तब सारस के झुंड अपने घोंसलों की ओर लौटते हैं। यह दृश्य अत्यंत मनोहर और मन को छू लेने वाला होता है। कवि इस सुंदर दृश्य को देखने का आनंद अगले जन्म में भी लेना चाहता है, इसलिए वह सारसों के बीच अंधेरे में होने की कल्पना करता है।
प्रश्न 5. कविता की चित्रात्मकता पर प्रकाश डालिए।
इस कविता में कवि ने बंगाल के प्राकृतिक दृश्यों को इतने सजीव और चित्रात्मक ढंग से चित्रित किया है कि पढ़ते समय वे सभी दृश्य आँखों के सामने घूमने लगते हैं। हरे-भरे, लहलहाते धान के खेत, कटहल के पेड़ की छाया, हवा से झूमती हुई पेड़ों की डालियाँ, आकाश में उड़ते हुए उल्लू और शाम को लौटते हुए सारसों के झुंड का चित्रण कवि ने बहुत ही कलात्मक तरीके से किया है। ये सभी बिंब पाठक के मन में एक सुंदर चित्र उकेर देते हैं।
प्रश्न 6. कविता में आए बिंबों का सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
कवि ने इस कविता में अनेक सुंदर और प्रभावशाली बिंबों का प्रयोग किया है जो बंगाल के सौंदर्य को और बढ़ा देते हैं। उदाहरण के लिए, बंगाल की युवतियों के पैरों में बँधे लाल घुंघरूओं का बिंब उनकी सजीवता और संस्कृति को दर्शाता है। हवा के झोंके से झूलती हुई वृक्षों की डालियाँ, आकाश में उड़ते हुए हंसों के झुंड और नदी के किनारे की हरी-भरी घास की सुगंध के बिंब पाठक के मन में एक मनमोहक दृश्य बना देते हैं। ये सभी बिंब कविता को चित्रात्मक और आकर्षक बनाते हैं।
प्रश्न 7. कविता के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
कविता का शीर्षक 'लौटकर आऊँगा फिर' पूर्णतः सार्थक और उपयुक्त है। यह शीर्षक कविता के मुख्य भाव और उद्देश्य को स्पष्ट रूप से व्यक्त करता है। पूरी कविता में कवि अपनी मातृभूमि बंगाल के प्रति गहरे प्रेम और लगाव को व्यक्त करते हुए, यह इच्छा प्रकट करता है कि वह अगले जन्म में भी इसी धरती पर लौटकर आएगा। शीर्षक ही कविता का केंद्रीय विचार है जिसके इर्द-गिर्द पूरी कविता घूमती है। इसलिए, यह शीर्षक विषयवस्तु के अनुरूप, संक्षिप्त और पूरी तरह सार्थक है।
प्रश्न 8. कवि अगले जन्म में अपने मनुष्य होने में क्यों संदेह करता है ? क्या कारण हो सकता है ?
कवि को अगले जन्म में मनुष्य के रूप में जन्म लेने में संदेह इसलिए है क्योंकि मनुष्य का जीवन अक्सर ईर्ष्या, द्वेष, कटुता और स्वार्थ से भरा होता है। उस समय के सामाजिक वातावरण में मानवीय मूल्यों का ह्रास हो रहा था और लोग आपसी मतभेदों में उलझे हुए थे। दूसरी ओर, पक्षियों और प्रकृति का जीवन सरल, निश्छल और प्रेम से भरा हुआ प्रतीत होता है। इसलिए कवि सोचता है कि शायद प्रकृति की गोद में पक्षी बनकर रहना, मनुष्य बनने से अधिक सुखद और शांतिपूर्ण होगा।
प्रश्न 9. व्याख्या करें :
(क) "बनकर शायद हँस मैं किसी किशोरी का; धुंघरू लाल पैरों में;
तैरता रहूँगा बल दिन-दिन भर पानी में-
गंध जहाँ होनी ही भरी, घास की।"
इन पंक्तियों में कवि बंगाल की मधुर स्मृतियों के बीच खो जाता है। वह कल्पना करता है कि अगले जन्म में वह शायद एक हंस बन जाए, जो किसी बंगाली युवती के लाल घुंघरूओं से सजे पैरों का हिस्सा बने। वह दिनभर बंगाल की नदियों के स्वच्छ जल में तैरता रहेगा, जहाँ तटों पर उगी हरी घास की सुगंध हवा में फैली रहती है। यहाँ कवि बंगाल की प्रकृति और संस्कृति के प्रति अपने गहरे लगाव और उसके साथ एकाकार हो जाने की इच्छा को व्यक्त कर रहा है।
(ख) "खेत हैं जहाँ घान के, बहती नदी
के किनारे फिर आऊँगा लौटकर
एक दिन-बंगाल में;"
इन पंक्तियों में कवि बंगाल के प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन करते हुए अपनी मातृभूमि के प्रति अटूट प्रेम व्यक्त करता है। वह कहता है कि जिस बंगाल की धरती पर हरे-भरे धान के खेत लहलहाते हैं और नदियाँ कल-कल करती हुई बहती हैं, उसी बंगाल में वह एक दिन अवश्य लौटकर आएगा। ये पंक्तियाँ कवि के हृदय में बसे बंगाल के चित्र और उससे मिलने की तीव्र अभिलाषा को दर्शाती हैं।
1. 'लौटकर आऊँगा फिर' कविता के कवि कौन हैं?
इस कविता के रचयिता डॉ. धर्मवीर भारती जी हैं।
2. कवि किसके लिए लौटकर आने की बात करता है?
कवि अपने प्रियतम के लिए लौटकर आने की बात करता है। वह उससे वादा करता है कि वह अवश्य लौटेगा, भले ही उसे कितनी भी दूरियाँ तय करनी पड़ें या कितनी भी कठिनाइयों का सामना करना पड़े।
3. कवि किस-किस रूप में लौटकर आने की बात करता है?
कवि निम्नलिखित विभिन्न रूपों में लौटकर आने की बात करता है:
- एक नन्हें से फूल के रूप में, जो उसके प्रिय के बालों में सजेगा।
- सुबह की पहली किरण के रूप में, जो उसके चेहरे पर चमकेगी।
- एक मधुर गीत के रूप में, जो उसके होठों पर बस जाएगा।
- एक सपने के रूप में, जो उसकी आँखों में छा जाएगा।
4. 'लौटकर आऊँगा फिर' कविता का मूल भाव स्पष्ट कीजिए।
इस कविता का मूल भाव अटूट प्रेम, विश्वास और पुनर्मिलन की आशा है। कवि अपने प्रिय से जुदा होने के बावजूद निराश नहीं है। वह विश्वास दिलाता है कि वह किसी न किसी रूप में अवश्य लौटेगा। यह कविता प्रेम की अमरता और उसकी सर्वव्यापकता को दर्शाती है। प्रेम शरीर की सीमाओं से परे है और प्रकृति के विभिन्न रूपों में प्रकट हो सकता है।
5. 'लौटकर आऊँगा फिर' कविता का शीर्षक सार्थक है- स्पष्ट कीजिए।
कविता का शीर्षक पूर्णतः सार्थक है। यह शीर्षक ही कविता के केंद्रीय भाव को स्पष्ट कर देता है। पूरी कविता में कवि बार-बार इसी बात पर ज़ोर देता है कि वह लौटकर आएगा। वह अलग-अलग रूपों में लौटने की बात करता है, जिससे यह आश्वासन और भी प्रबल हो जाता है। शीर्षक में 'फिर' शब्द आशा और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है, जो कविता के मूड को पूरी तरह से प्रतिबिंबित करता है।
6. 'लौटकर आऊँगा फिर' कविता के आधार पर बताइए कि कवि किस प्रकार अपने प्रिय के पास लौटकर आना चाहता है?
कवि भौतिक शरीर से नहीं, बल्कि प्रकृति और भावनाओं के सूक्ष्म एवं सुंदर रूपों में लौटकर आना चाहता है। वह एक कोमल फूल, सुबह की सुनहरी किरण, एक मधुर गीत या एक सुखद सपने के रूप में प्रकट होकर अपने प्रिय के जीवन में हमेशा बना रहना चाहता है। इस तरह, वह शारीरिक दूरी के बावजूद अपनी उपस्थिति का एहसास कराना चाहता है।
7. 'लौटकर आऊँगा फिर' कविता में कवि ने प्रकृति के किन-किन रूपों का वर्णन किया है?
इस कविता में कवि ने प्रकृति के निम्नलिखित सुंदर और कोमल रूपों का वर्णन किया है:
- एक छोटा सा फूल
- सुबह की पहली सुनहरी किरण
- चाँदनी रात की शीतल चमक
- बादलों की गर्जन और बरसात की बूंदों का संगीत
ये सभी रूप प्रेम के सौम्य, स्थायी और सर्वव्यापी स्वरूप को दर्शाते हैं।
8. 'लौटकर आऊँगा फिर' कविता का केंद्रीय भाव लिखिए।
कविता का केंद्रीय भाव यह है कि सच्चा प्रेम मृत्यु या विछोह से भी नहीं मरता। वह हमेशा जीवित रहता है और प्रकृति के विविध रूपों में प्रकट होकर अपने प्रिय के सान्निध्य में लौट आता है। यह कविता प्रेम की अमरता और उसकी अनंत यात्रा पर विश्वास व्यक्त करती है।
9. 'लौटकर आऊँगा फिर' कविता में निहित संदेश स्पष्ट कीजिए।
इस कविता का संदेश है कि हमें जीवन में कभी भी आशा नहीं खोनी चाहिए और प्रेम के बंधन को सबसे ऊपर रखना चाहिए। अगर मन में सच्चा प्रेम और दृढ़ संकल्प हो, तो कोई भी बाधा हमें अपने लक्ष्य तक पहुँचने से नहीं रोक सकती। प्रेमी चाहे शारीरिक रूप से दूर ही क्यों न हो, उसकी यादें और भावनाएँ हमेशा साथ रहती हैं।
10. 'लौटकर आऊँगा फिर' कविता की भाषा-शैली पर प्रकाश डालिए।
इस कविता की भाषा सरल, सहज एवं मार्मिक खड़ी बोली हिंदी है। इसमें तत्सम और तद्भव शब्दों का सुंदर मिश्रण है। शैली गेयात्मक और प्रतीकात्मक है। कवि ने प्रकृति के माध्यम से अपने भावों को व्यक्त किया है, जिससे कविता में चित्रात्मकता आ गई है। पुनरुक्ति प्रभाव (जैसे 'लौटकर आऊँगा फिर') और मधुर लय कविता को संगीतात्मक बनाती है, जो पाठक के मन पर गहरा प्रभाव छोड़ती है।
1. 'लौटकर आऊँगा फिर' कविता के कवि कौन हैं?
उत्तर: इस कविता के कवि डॉ. धर्मवीर भारती हैं।
2. 'लौटकर आऊँगा फिर' कविता में कवि ने किसके आने की बात कही है?
उत्तर: इस कविता में कवि ने नए युग, नई सुबह और नए जीवन के आने की बात कही है। यह एक ऐसे व्यक्तित्व के आगमन का संकेत है जो समाज में फैली निराशा, भ्रष्टाचार और अंधकार को दूर करेगा और न्याय, प्रेम तथा उजाले का नया युग लाएगा।
3. 'लौटकर आऊँगा फिर' कविता का मूल भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: कविता का मूल भाव आशावाद और परिवर्तन की आकांक्षा है। कवि वर्तमान के अंधकार, झूठ, भ्रष्टाचार और शोषण से व्यथित है, लेकिन वह निराश नहीं है। वह विश्वास दिलाता है कि वह एक नए रूप में लौटेगा और इस सड़े हुए समाज को बदल देगा। वह एक ऐसा युगदृष्टा बनकर आएगा जो लोगों को सच्चाई, न्याय और प्रेम का मार्ग दिखाएगा, उनकी बेड़ियाँ तोड़ेगा और एक नई, उज्ज्वल सभ्यता की स्थापना करेगा। यह कविता अंततः मानवीय आस्था और बेहतर भविष्य की जीत में विश्वास का प्रतीक है।
4. 'लौटकर आऊँगा फिर' कविता के आधार पर बताइए कि कवि किस रूप में लौटकर आना चाहता है?
उत्तर: कविता के आधार पर कवि निम्नलिखित रूपों में लौटकर आना चाहता है:
1. एक नए युग के सूर्य के रूप में, जो अंधकार मिटाकर उजाला फैलाए।
2. एक क्रांतिकारी नेता युग-दृष्टा के रूप में, जो लोगों को गलत रास्ते से हटाकर सही मार्ग दिखाए।
3. एक मुक्तिदाता के रूप में, जो शोषितों की बेड़ियाँ काटे और उन्हें स्वतंत्रता दिलाए।
4. सच्चाई और प्रेम के प्रतीक के रूप में, जो झूठ और घृणा को समाप्त करे।
5. एक नई सभ्यता के निर्माता के रूप में, जो टूटे हुए सपनों और मूल्यों को फिर से स्थापित करे।
5. 'लौटकर आऊँगा फिर' कविता के आधार पर बताइए कि वर्तमान युग में क्या-क्या बुराइयाँ व्याप्त हैं?
उत्तर: कविता के अनुसार, वर्तमान युग में निम्नलिखित बुराइयाँ व्याप्त हैं:
1. अंधकार और निराशा का वातावरण है।
2. झूठ और छल-कपट का बोलबाला है।
3. शोषण और अन्याय से समाज ग्रस्त है; गरीबों का शोषण हो रहा है।
4. भ्रष्टाचार और लालच ने सबको अपने चंगुल में ले लिया है।
5. मानवीय मूल्यों का पतन हुआ है; प्रेम, सच्चाई और न्याय लुप्त हो गए हैं।
6. लोग गुलामी की मानसिकता से जकड़े हुए हैं और अपने अधिकारों के लिए नहीं लड़ रहे।
7. समाज में घृणा और विषमता फैली हुई है।
6. 'लौटकर आऊँगा फिर' कविता के आधार पर बताइए कि कवि क्या-क्या परिवर्तन लाना चाहता है?
उत्तर: कवि निम्नलिखित परिवर्तन लाना चाहता है:
1. वह अंधकार को दूर कर उजाला फैलाना चाहता है।
2. वह झूठ और भ्रष्टाचार को समाप्त कर सच्चाई और पारदर्शिता स्थापित करना चाहता है।
3. वह शोषितों और दलितों की बेड़ियाँ काटकर उन्हें स्वतंत्रता और सम्मान दिलाना चाहता है।
4. वह टूटे हुए सपनों और मानवीय मूल्यों को फिर से जीवित करना चाहता है।
5. वह घृणा के स्थान पर प्रेम और एकता की नई संस्कृति का निर्माण करना चाहता है।
6. वह एक न्यायपूर्ण, निष्पक्ष और खुशहाल नई सभ्यता की स्थापना करना चाहता है।
7. 'लौटकर आऊँगा फिर' कविता की भाषागत विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: इस कविता की भाषागत विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. भाषा: कविता की भाषा सरल, सहज और प्रवाहमयी खड़ी बोली हिंदी है जो आम जनता तक आसानी से पहुँच सकती है।
2. शैली: भावनात्मक और आह्वानात्मक शैली का प्रयोग हुआ है, जो पाठक को प्रेरित करती है।
3. अलंकार: कविता में प्रतीकात्मकता और अनुप्रास अलंकार का सुंदर प्रयोग मिलता है (जैसे - "सपनों के सहारे")।
4. प्रतीक: 'अंधकार', 'उजाला', 'बेड़ियाँ', 'सूर्य' जैसे शक्तिशाली प्रतीकों का उपयोग कवि ने गहरे भाव व्यक्त करने के लिए किया है।
5. छंद: कविता मुक्त छंद में लिखी गई है, जिससे भावों की अभिव्यक्ति में स्वाभाविकता आई है।
6. संवादात्मकता: भाषा में एक संवादात्मक गुण है, मानो कवि सीधे पाठक से बात कर रहा हो।
8. 'लौटकर आऊँगा फिर' कविता के आधार पर बताइए कि कवि ने 'सपनों के सहारे' क्यों कहा है?
उत्तर: कवि ने 'सपनों के सहारे' इसलिए कहा है क्योंकि सपने आशा और परिवर्तन की प्रेरणा के स्रोत होते हैं। वर्तमान युग में जब चारों ओर निराशा और अंधकार है, तब केवल एक बेहतर भविष्य का सपना ही लोगों को आगे बढ़ने की ताकत दे सकता है। ये सपने ही हैं जो मनुष्य को हार नहीं मानने देते और संघर्ष करने के लिए प्रेरित करते हैं। कवि का यह वाक्यांश यह संदेश देता है कि हमें अपने आदर्शों और बेहतर कल के सपनों को कभी नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि वे ही अंततः उस नए युग के निर्माण का आधार बनेंगे।
9. 'लौटकर आऊँगा फिर' कविता के आधार पर बताइए कि कवि ने 'नया इतिहास' किसे कहा है?
उत्तर: कवि ने आने वाले न्यायपूर्ण, प्रेमपूर्ण और उज्ज्वल युग को 'नया इतिहास' कहा है। वर्तमान इतिहास शोषण, अन्याय और अंधकार से भरा हुआ है। कवि जब लौटकर आएगा, तो वह इन सभी बुराइयों को मिटाकर एक ऐसा युग शुरू करेगा जहाँ सच्चाई, स्वतंत्रता और मानवीय गरिमा कायम होगी। यही परिवर्तित समय और नई सभ्यता ही 'नया इतिहास' होगी, जो पुराने कलंकित इतिहास को बदल देगी और मानवता के लिए एक स्वर्णिम अध्याय की शुरुआत करेगी।
10. 'लौटकर आऊँगा फिर' कविता का शीर्षक सार्थक है- स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: हाँ, कविता का शीर्षक 'लौटकर आऊँगा फिर' पूर्णतः सार्थक और प्रतीकात्मक है। यह शीर्षक केवल एक व्यक्ति के वापस आने की बात नहीं करता, बल्कि आशा, पुनर्जन्म और क्रांतिकारी परिवर्तन के आगमन का वादा करता है। यह शीर्षक कविता के केंद्रीय भाव – वर्तमान अंधकार के बावजूद एक उज्ज्वल भविष्य की अटूट आस्था – को पूरी तरह व्यक्त करता है। 'लौटकर आना' एक नए रूप में, एक नए संकल्प के साथ आने का प्रतीक है। इस प्रकार, शीर्षक कविता के संदेश और उसकी आशावादी भावना का सटीक प्रतिनिधित्व करता है, जो इसे अत्यंत सार्थक बनाता है।
प्रश्न 1.
कवि ने इस कविता में क्या संकल्प व्यक्त किया है?
कवि ने इस कविता में यह संकल्प व्यक्त किया है कि वह अपनी मातृभूमि बंगाल से अटूट प्रेम करता है। वह वादा करता है कि वर्तमान जीवन के बाद भी, वह फिर से लौटकर आएगा। वह बंगाल की प्राकृतिक सुंदरता—जैसे नदियाँ, धान के खेत, पक्षी और स्थानीय जीवन—के बीच रहना चाहता है। कवि का यह संकल्प उसके गहन प्रकृति-प्रेम और जन्मभूमि के प्रति आकर्षण को दर्शाता है।
प्रश्न 2.
बनकर शायद हंस मैं किसी किशोरी का, धुंघरू लाल पैरों में,
तैरता रहूँगा बस दिन-दिन भर पानी मैं-
गंध जहाँ होगी ही भरी, घास की।
आऊँगा मैं। नदियाँ, मैदान बंगाल के बुलाएँगे मैं आऊंगा जिसे नदी धोती ही रहती है पानी से-इसी हरे सजल किनारे पर।
व्याख्या-
इन पंक्तियों में कवि जीवनानंद दास बंगाल की प्रकृति के प्रति अपने गहरे लगाव को व्यक्त करते हैं। कवि कल्पना करता है कि वह एक हंस बनकर वापस आएगा। वह बंगाल की नदियों में तैरता रहेगा, जहाँ हरी घास की सुगंध हवा में भरी होगी। वह उन किशोरियों के पैरों में बँधे लाल धुंघरुओं की मधुर आवाज़ सुनना चाहता है। कवि कहता है कि बंगाल की नदियाँ और उसके विशाल मैदान उसे बुलाएँगे और वह अवश्य आएगा। वह उस हरे-भरे, नम किनारे पर आकर बसना चाहता है, जिसे नदी का पानी सदैव धोता रहता है। यह व्याख्या कवि की मातृभूमि के प्रति अनन्य प्रेम और उसकी स्मृतियों में डूबी हुई लालसा को प्रकट करती है।
प्रश्न 3.
शायद तुम देखोगे शाम की हवा के साथ उड़ते एक उल्लू को
शायद तुम सुनोगे कपास के पेड़ पर उसकी बोली
घासीली जमीन पर फेंकेगा मुट्ठी भर-भर चावल
शायद कोई बच्चा-उबले हुए !
देखोगे, रूपसा के गंदले-से पानी में
नाव लिए जाते एक लड़के को-उड़ते
फटे पाल की नाव!
लौटते होंगे रंगीन बादलों के बीच, सारस
अंधेरे में होऊंगा मैं उन्हीं के बीच में
देखना!
व्याख्या-
इन पंक्तियों में कवि बंगाल के सामान्य जीवन और प्राकृतिक दृश्यों का एक जीवंत चित्र प्रस्तुत करता है। वह कहता है कि तुम शाम की हवा में उड़ते उल्लू को देखोगे और कपास के पेड़ पर उसकी आवाज़ सुनोगे। कोई छोटा बच्चा उबले चावल की मुट्ठी घास से ढकी जमीन पर फेंकता दिखेगा। रूपसा नदी के गंदले पानी में एक लड़का फटे पाल वाली नाव लेकर जाता हुआ दिखाई देगा। संध्या के समय रंगीन बादलों के बीच सारस पक्षियों के झुंड लौटते नजर आएँगे। कवि अंत में रहस्यमय अंदाज में कहता है कि उस अंधेरे में, वह स्वयं उन्हीं सारसों के बीच मौजूद होगा। यह व्याख्या बंगाल के ग्रामीण परिवेश की सूक्ष्म और मनोहर छवियों को उकेरती है, जिनके बीच कवि स्वयं को विलीन कर देना चाहता है।
लौटकर आऊँग फिर कवि परिचय
जीवनानंद दास बांग्ला साहित्य के एक अत्यंत सम्मानित एवं प्रभावशाली कवि थे। उनका जन्म 1899 ईस्वी में हुआ था। रवींद्रनाथ टैगोर के बाद, बांग्ला साहित्य में आधुनिक काव्य आंदोलन को आगे बढ़ाने वालों में जीवनानंद दास सबसे मौलिक और प्रमुख कवि माने जाते हैं। उन्होंने रवींद्रनाथ के स्वच्छंदतावाद से अलग हटकर कविता में एक नया यथार्थवादी दृष्टिकोण स्थापित किया। उन्होंने बंगाल के सामान्य जनजीवन, उसकी संस्कृति और प्रकृति को गहराई से पहचाना और अपनी कविता में उसे एक नई भाषा और शैली में प्रस्तुत किया।
दुर्भाग्यवश, मात्र 55 वर्ष की आयु में 1954 ईस्वी में एक दुर्घटना में उनका निधन हो गया। उनके प्रमुख काव्य संग्रहों में 'झरा पालक', 'धूसर पांडुलिपि', 'वनलता सेन' आदि शामिल हैं। 'वनलता सेन' कविता को रवींद्रोत्तर युग की श्रेष्ठतम प्रेम कविता माना जाता है। प्रस्तुत कविता "लौटकर आऊँगा फिर" का हिंदी अनुवाद प्रयाग शुक्ल ने किया है। इसमें कवि का अपनी मातृभूमि बंगाल के प्रति गहरा प्रेम और उसकी स्मृतियों में लौटने की तीव्र इच्छा व्यक्त हुई है।
लौटकर आऊँग फिर Summary in Hindi
प्रस्तुत कविता "लौटकर आऊँगा फिर" बांग्ला के प्रसिद्ध कवि जीवनानंद दास की एक लोकप्रिय रचना है, जिसका हिंदी अनुवाद प्रयाग शुक्ल ने किया है। इस कविता में कवि ने अपनी मातृभूमि बंगाल के प्रति असीम प्रेम और लगाव को व्यक्त किया है। कवि का मानना है कि मनुष्य का शरीर नश्वर है, परन्तु उसकी आत्मा अमर है। इसी विश्वास के साथ वह संकल्प लेता है कि वह इस जीवन के बाद भी किसी न किसी रूप में अवश्य लौटेगा और बंगाल की इस पावन धरती पर ही जन्म लेगा।
कवि बंगाल के प्राकृतिक सौंदर्य—नदियों, हरे-भरे मैदानों, धान के खेतों, पक्षियों और स्थानीय ग्रामीण जीवन के चित्रों—के माध्यम से अपनी भावनाएँ व्यक्त करता है। वह हंस बनकर नदियों में तैरना, उल्लू की आवाज सुनना और सारसों के झुंड के बीच उड़ना चाहता है। यह कविता केवल प्रकृति-वर्णन नहीं है, बल्कि मातृभूमि के प्रति एक कवि की गहरी आस्था, स्मृतियों में बसी तड़प और पुनर्मिलन की अदम्य इच्छा का मार्मिक दस्तावेज है।
लौटकर आऊँगा फिर (कवि - सुकान्त भट्टाचार्य)
1. कवि कहाँ लौटकर आना चाहता है और क्यों?
कवि बंगाल की इसी पावन धरती पर लौटकर आना चाहता है। उसका यह प्रबल इच्छा इसलिए है क्योंकि उसे अपनी मातृभूमि बंगाल से अगाध प्रेम है। वह चाहता है कि मृत्यु के बाद भी उसकी आत्मा का वास इसी प्रिय भूमि पर बना रहे, चाहे वह किसी भी रूप में हो।
2. कवि किन-किन रूपों में लौटकर आना चाहता है?
कवि किसी भी रूप में इस धरती पर लौटने को तैयार है। वह मनुष्य के रूप में तो आना चाहता ही है, परन्तु यदि ऐसा न हो सके तो वह अबाबील चिड़िया, कौवा, हंस या सारस पक्षी बनकर भी यहाँ विचरण करना चाहता है। वह नदी के जल, कपास के पेड़ों की सरसराहट और संध्या के आकाश में उड़ते पक्षियों के झुंड का हिस्सा बनकर भी यहाँ रहना चाहता है।
3. 'लौटकर आऊँगा फिर' कविता के आधार पर बताएँ कि कवि को बंगाल से कितना लगाव है?
कवि का बंगाल से लगाव इतना गहरा और अटूट है कि वह जन्म-मृत्यु के चक्र से भी ऊपर है। वह अपने अस्तित्व को सदैव बंगाल की प्रकृति से जोड़कर देखता है। उसकी इच्छा है कि मृत्यु के बाद भी उसकी चेतना इसी भूमि की नदियों, हवाओं, वनस्पतियों और जीवों में बसी रहे। यह लगाव सिर्फ भावनात्मक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और अस्तित्वगत है।
4. 'लौटकर आऊँगा फिर' कविता का प्रतिपाद्य लिखें।
इस कविता का मुख्य विषय मातृभूमि के प्रति गहन आत्मीय लगाव और अमर प्रेम है। कवि सुकान्त भट्टाचार्य यह व्यक्त करते हैं कि मनुष्य का शरीर नश्वर है, परन्तु उसकी आत्मा और उसका प्रेम अमर है। वे बंगाल की इस धरती से इतना प्यार करते हैं कि मृत्यु के बाद भी किसी न किसी रूप में यहीं लौटकर आना चाहते हैं। कविता यह संदेश देती है कि सच्चा देशप्रेह व्यक्ति को मृत्यु के पार भी अपनी मातृभूमि से बाँधे रखता है।
5. निम्नलिखित पंक्तियों का भाव स्पष्ट करें:
‘नहीं जन्म लूँ तो अबाबील, कौवा, हँस आदि में जन्म लेकर भी बंगाल की धरती पर ही विचरण करूँ।’
इन पंक्तियों का भाव यह है कि कवि की मातृभूमि बंगाल के प्रति अनन्य आसक्ति है। उनके लिए मनुष्य योनि में जन्म लेना सर्वोत्तम है, लेकिन अगर ऐसा संभव नहीं होता, तो वे किसी भी साधारण से दिखने वाले प्राणी (जैसे अबाबील, कौवा या हंस) के रूप में जन्म लेकर भी संतुष्ट हैं, बशर्ते वह जन्म इसी बंगाल की धरती पर हो। इससे कवि के त्याग और अपनी जन्मभूमि के प्रति समर्पण की भावना प्रकट होती है।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
1. 'लौटकर आऊँगा फिर' कविता के कवि कौन हैं?
(क) रवीन्द्रनाथ टैगोर
(ख) सुकान्त भट्टाचार्य
(ग) नजरुल इस्लाम
(घ) शमशेर बहादुर सिंह
2. कवि कहाँ लौटकर आना चाहता है?
(क) दिल्ली
(ख) बंगाल
(ग) उत्तर प्रदेश
(घ) असम
3. कवि मनुष्य के अलावा किस रूप में लौटकर आने की इच्छा रखता है?
(क) पेड़-पौधे
(ख) नदी का पानी
(ग) अबाबील, कौवा, हंस
(घ) उपर्युक्त सभी
4. इस कविता का मुख्य भाव क्या है?
(क) प्रकृति प्रेम
(ख) मातृभूमि के प्रति अमर प्रेम
(ग) पशु-पक्षियों से स्नेह
(घ) जीवन की नश्वरता
5. 'रूपसा' क्या है?
(क) एक पक्षी
(ख) बंगाल की एक नदी
(ग) एक फूल
(घ) एक त्योहार
शब्दार्थ
अबाबील : एक छोटी काली चिड़िया जो अक्सर उजड़े घरों में घोंसला बनाती है।
भाड़की पेंग : झूले का दोलन या झूलने की क्रिया।
रूपसा : बंगाल (अब बांग्लादेश) में बहने वाली एक नदी का नाम।
सारस : एक लम्बी टाँगों वाला सुन्दर पक्षी, जिसे क्रौंच भी कहते हैं।
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