Bihar Board Class 10th Hindi (Godhuli Bhag 2 पद्य खण्ड) Chapter 6 जनतंत्र का जन्म) Solutions

Here we have provided Solution for Chapter 6 जनतंत्र का जन्म) of Hindi (Godhuli Bhag 2 पद्य खण्ड) subject for Class 10th students of Bihar Board of Secondary Education. There are various chapters in this Hindi (Godhuli Bhag 2 पद्य खण्ड) such as Chapter 1 राम बिनु बिरथे जगि जनमा, जो नर दुख में दुख नहिं मानै), Chapter 2 प्रेम अयनि श्री राधिका, करील के कुंजन ऊपर वारौं), Chapter 3 अति सूधो सनेह को मारग है, मो अंसुवानिहिं लै बरसौ), Chapter 4 स्वदेशी), Chapter 5 भारतमाता), Chapter 6 जनतंत्र का जन्म), Chapter 7 हिरोशिमा), Chapter 8 एक वृक्ष की हत्या), Chapter 9 हमारी नींद), Chapter 10 अक्षर(ज्ञान), Chapter 11 लौटकर आऊँग फिर) and Chapter 12 मेरे बिना तुम प्रभु). Summary of the same is given below:

Board NameBihar Board of Secondary Education
ClassClass 10th
Content TypeSolution
Solution forClass 10th students
SubjectHindi (Godhuli Bhag 2 पद्य खण्ड)
Chapter NameChapter 6 जनतंत्र का जन्म)
Total Number of Chapter in this Subject12

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Bihar Board Class 10th Hindi (Godhuli Bhag 2 पद्य खण्ड) Chapter 6 जनतंत्र का जन्म) Solutions

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जनतंत्र का जन्म (पद्य खण्ड)

प्रश्न 1. कवि ने किसको संबोधित करते हुए कहा है कि तुम किसी को कुछ नहीं सिखा सकते?

कवि ने सत्ताधारी वर्ग अर्थात् शासकों और नेताओं को संबोधित करते हुए यह कहा है। कवि का आशय है कि जो लोग स्वयं ही अहंकार, स्वार्थ और अज्ञान में डूबे हुए हैं, वे दूसरों को ज्ञान या सही मार्ग नहीं दिखा सकते। उनकी शिक्षा और उपदेश निरर्थक हैं क्योंकि उनके कर्म उनके शब्दों से मेल नहीं खाते।

प्रश्न 2. कवि ने किस प्रकार के लोगों को ढूँढ़ने की बात कही है?

कवि ने सच्चे और ईमानदार लोगों को ढूँढ़ने की बात कही है। ऐसे लोग जो दिखावे और अहंकार से दूर, सरल हृदय के हों, जो दूसरों की सेवा और कल्याण के लिए तत्पर रहते हों। कवि के अनुसार, जनतंत्र की सफलता के लिए ऐसे ही निस्वार्थ और कर्तव्यनिष्ठ लोगों की आवश्यकता है, न कि केवल बातें करने वालों की।

प्रश्न 3. कवि ने किन पंक्तियों में यह स्पष्ट किया है कि जनता सच्चे नेतृत्व के लिए तरस रही है?

कवि ने निम्नलिखित पंक्तियों के माध्यम से यह स्पष्ट किया है:
"तुम सब ताकतवर, तुम सब धनी, तुम सब ज्ञानी हो,
पर जनता तो भूखी है, अशिक्षित है, दरिद्र है,
उसे राह दिखाने वाला कोई सच्चा हृदय चाहिए।"

इन पंक्तियों में कवि कहता है कि भले ही सत्ता में बैठे लोग शक्तिशाली, धनी और पढ़े-लिखे हैं, लेकिन आम जनता अभी भी बुनियादी समस्याओं से जूझ रही है। उसे ऐसे नेता चाहिए जो उसके दर्द को समझें और उसके उत्थान के लिए ईमानदारी से काम करें।

प्रश्न 4. 'जनतंत्र का जन्म' कविता का मूल भाव स्पष्ट कीजिए।

कविता का मूल भाव यह है कि सच्चे जनतंत्र की स्थापना केवल कागजी घोषणाओं या चुनाव जीतने से नहीं होती। इसके लिए एक नैतिक और आध्यात्मिक क्रांति की आवश्यकता है। कवि वर्तमान शासक वर्ग की आलोचना करता है जो अहंकारी और जनता से कटा हुआ है। वह जनता को जागृत करता है कि वह ऐसे नेताओं की खोज करे जो सेवा, सादगी और ईमानदारी के गुणों से युक्त हों। सच्चा जनतंत्र तभी जन्म लेगा जब शासन करने वालों के हृदय में जनता के प्रति सच्ची करुणा और सेवा की भावना होगी।

प्रश्न 5. 'जनतंत्र का जन्म' कविता में निहित व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए।

इस कविता में कवि ने तथाकथित लोकतांत्रिक नेताओं और व्यवस्था पर करारा व्यंग्य किया है। वह उन लोगों पर चोट करता है जो खुद को ज्ञानी और ताकतवर बताते हैं, लेकिन जनता की वास्तविक पीड़ा को नहीं समझते। "तुम किसी को कुछ नहीं सिखा सकते" जैसी पंक्तियाँ उनके खोखले दावों और झूठे अहंकार को उजागर करती हैं। कवि यह भी व्यंग्य करता है कि जनता को मूर्ख समझकर उसे सस्ते वादों में उलझाया जाता है, जबकि उसके सामने भूख, गरीबी और अशिक्षा जैसी गंभीर समस्याएँ हैं। यह व्यंग्य जनता को सचेत करने और सच्चे नेतृत्व की माँग करने के लिए प्रेरित करता है।

प्रश्न 6. 'जनतंत्र का जन्म' कविता के आधार पर सच्चे जनतंत्र की कल्पना कीजिए।

कविता के आधार पर सच्चे जनतंत्र की कल्पना एक ऐसी व्यवस्था के रूप में की जा सकती है जहाँ:
1. नेता जनता के सेवक हों, उनके स्वामी नहीं। उनमें अहंकार न हो, बल्कि विनम्रता और करुणा हो।
2. शासन का उद्देश्य केवल सत्ता पाना न हो, बल्कि आखिरी पंक्ति में खड़े व्यक्ति के जीवन में सुधार लाना हो।
3. निर्णय लेने की प्रक्रिया में जनता की सच्ची भागीदारी हो और उनकी आवाज सुनी जाए।
4. समाज का केंद्र बिंदु भौतिक समृद्धि न होकर नैतिक मूल्य, सामाजिक न्याय और मानवीय गरिमा हो।
ऐसा जनतंत्र केवल कानूनों से नहीं, बल्कि लोगों के हृदय परिवर्तन से ही संभव है।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

1. 'जनतंत्र का जन्म' कविता के रचयिता कौन हैं?
A. सुमित्रानंदन पंत
B. रामधारी सिंह 'दिनकर'
C. हरिवंशराय बच्चन
D. सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'

उत्तर: B. रामधारी सिंह 'दिनकर'

2. कवि के अनुसार सच्चा जनतंत्र किससे पैदा होगा?
A. नए कानूनों से
B. हृदय परिवर्तन से
C. शिक्षा के प्रसार से
D. आर्थिक विकास से

उत्तर: B. हृदय परिवर्तन से

3. कवि ने किसकी खोज करने की बात कही है?
A. नए संसाधनों की
B. सच्चे मनुष्य की
C. खोए हुए धन की
D. प्राचीन ज्ञान की

उत्तर: B. सच्चे मनुष्य की

4. "तुम किसी को कुछ नहीं सिखा सकते" - यह कथन कवि ने किसके लिए कहा है?
A. शिक्षकों के लिए
B. सत्ताधारियों के लिए
C. माता-पिता के लिए
D. धर्मगुरुओं के लिए

उत्तर: B. सत्ताधारियों के लिए

5. कविता में 'हृदय' शब्द किसका प्रतीक है?
A. प्रेम का
B. भय का
C. नैतिकता और करुणा का
D. साहस का

उत्तर: C. नैतिकता और करुणा का

जनतंत्र का जन्म (पद्य खण्ड)

1. कवि ने जनतंत्र का जन्म कहाँ बताया है?

कवि ने जनतंत्र का असली जन्म साधारण जनता के बीच बताया है। उनका मानना है कि जनतंत्र का उदय राजमहलों या संसद भवनों में नहीं, बल्कि खेतों में काम करने वाले किसानों, पहाड़ों पर रहने वाले मजदूरों और गाँव-ढाणियों में रहने वाले सामान्य लोगों के बीच होता है। जब इन लोगों को अपने अधिकारों का ज्ञान होता है और वे अपनी आवाज उठाते हैं, तभी सच्चे जनतंत्र का जन्म होता है।

2. कवि ने किन पंक्तियों में यह बताया है कि हमारी स्वतंत्रता अधूरी है?

कवि ने निम्नलिखित पंक्तियों के माध्यम से यह बताया है कि हमारी स्वतंत्रता अधूरी है:
"अभी तो खिला है सूरज अधूरा, अभी तो आया जनतंत्र अधूरा।"
इन पंक्तियों में कवि कहते हैं कि देश को मिली आजादी और जनतंत्र पूर्ण नहीं है। जब तक समाज के हर वर्ग, विशेषकर गरीब, शोषित और वंचित लोगों को उनका हक और सम्मान नहीं मिलता, तब तक स्वतंत्रता का सूरज पूरी तरह नहीं खिला है।

3. कवि ने 'सबसे निचले पायदान' से किनका उल्लेख किया है?

कवि ने 'सबसे निचले पायदान' से समाज के उन वंचित और शोषित वर्गों का उल्लेख किया है जिन्हें हमेशा से ही उपेक्षित रखा गया है। इनमें गरीब किसान, मजदूर, भटकने वाले खानाबदोश, छोटे दस्तकार और वे सभी लोग शामिल हैं जो समाज की मुख्यधारा से कटे हुए हैं और जिनकी आवाज को दबा दिया जाता है। कवि का कहना है कि जब तक इन सबसे निचले स्तर के लोगों की स्थिति नहीं सुधरती, तब तक देश का विकास असंभव है।

4. कवि ने किन पंक्तियों में यह स्पष्ट किया है कि जनतंत्र की रक्षा करना हम सबका कर्तव्य है?

कवि ने यह भावना इन पंक्तियों में व्यक्त की है:
"जनतंत्र को सच्चे सपूतों की, अब जरूरत है बेटी-बेटों।"
इन पंक्तियों के माध्यम से कवि हर नागरिक को जनतंत्र का सच्चा सपूत बनने का आह्वान करते हैं। वे कहते हैं कि जनतंत्र की रक्षा केवक सरकार या नेताओं का काम नहीं है, बल्कि देश के हर बेटे-बेटी का यह पवित्र कर्तव्य है कि वे इसकी रक्षा करें, इसे मजबूत बनाएँ और इसे कभी कमजोर न होने दें।

5. 'जनतंत्र का जन्म' कविता का मूल भाव स्पष्ट कीजिए।

कविता 'जनतंत्र का जन्म' का मूल भाव यह है कि सच्चा जनतंत्र तभी सफल माना जाएगा जब वह समाज के आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुँचे और उसके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए। कवि का मानना है कि केवल चुनाव करा लेना या सरकार बना लेना ही जनतंत्र नहीं है। असली जनतंत्र तो तब आता है जब गरीबी, भुखमरी, अशिक्षा और शोषण समाप्त हो जाते हैं। कविता हमें यह याद दिलाती है कि हमारी स्वतंत्रता और लोकतंत्र तब तक अधूरे हैं जब तक हर नागरिक को गरिमा और समान अवसर नहीं मिलते। यह कविता एक जागरूकता का संदेश है जो हर नागरिक से अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने की अपील करती है।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

1. 'जनतंत्र का जन्म' कविता के रचयिता हैं-

(क) सुमित्रानंदन पंत
(ख) रामधारी सिंह 'दिनकर'
(ग) रामावतार त्यागी
(घ) मैथिलीशरण गुप्त

2. कवि के अनुसार जनतंत्र का जन्म कहाँ होता है?

(क) संसद में
(ख) विधानसभा में
(ग) खेत-खलिहानों में
(घ) अदालत में

3. 'सबसे निचले पायदान' से कवि का क्या आशय है?

(क) सरकारी कर्मचारी
(ख) समाज के वंचित और पिछड़े लोग
(ग) सैनिक
(घ) अधिकारी

4. 'जनतंत्र का जन्म' कविता में कवि ने किसकी आवश्यकता बताई है?

(क) नेताओं की
(ख) जनतंत्र के सच्चे सपूतों की
(ग) धनवानों की
(घ) विदेशी सहायता की

5. 'अभी तो खिला है सूरज अधूरा' पंक्ति में 'सूरज' किसका प्रतीक है?

(क) देश की प्रगति का
(ख) स्वतंत्रता और जनतंत्र का
(ग) नए युग का
(घ) कवि के मन के उल्लास का

जनतंत्र का जन्म (पद्य खण्ड)

1. कवि ने जनतंत्र का जन्म कहाँ बताया है ?

कवि ने जनतंत्र का असली जन्म गाँव-गाँव, गली-गली और खेत-खलिहानों में बताया है। उनका मानना है कि जनतंत्र तभी सफल होगा जब उसकी जड़ें आम जनता के बीच, उनके रोजमर्रा के जीवन और कामकाज के स्थानों में होंगी, न कि सिर्फ शहरों या सरकारी दफ्तरों में।

2. कवि ने जनतंत्र के लिए क्या-क्या अपेक्षाएँ की हैं ?

कवि ने जनतंत्र के लिए निम्नलिखित अपेक्षाएँ की हैं:

  • जनतंत्र का वास्तविक स्वरूप गाँवों और खेतों में दिखाई देना चाहिए।
  • सभी नागरिकों को समान अधिकार और सम्मान मिलना चाहिए।
  • समाज से छुआछूत, ऊँच-नीच और भेदभाव की भावना समाप्त होनी चाहिए।
  • हर व्यक्ति को अपनी बात कहने और विकास करने का अवसर मिलना चाहिए।
  • जनतंत्र सिर्फ चुनाव तक सीमित न रहे, बल्कि लोगों के दैनिक जीवन का हिस्सा बने।

3. कवि ने किन पंक्तियों में यह स्पष्ट किया है कि जनतंत्र का जन्म लोकतंत्र की स्थापना मात्र से नहीं हो जाता ?

कवि ने इन पंक्तियों के माध्यम से यह स्पष्ट किया है:
"सबकी सम्मति के रस में पगी हुई,
धरती की गोद से उठी नई फसल-सी।"


इन पंक्तियों का भाव है कि जनतंत्र का असली जन्म तब होता है जब वह हर व्यक्ति की सहमति और भागीदारी से सींचा जाए, और उसके सुखद परिणाम आम जनता के जीवन में एक नई फसल की तरह दिखाई दें। केवल संविधान में लिख देने या सरकार बना देने से ही जनतंत्र सफल नहीं हो जाता।

4. कवि ने जनतंत्र के जन्म के लिए किन स्थितियों को आवश्यक माना है ?

कवि के अनुसार, जनतंत्र के सच्चे जन्म के लिए निम्नलिखित स्थितियाँ आवश्यक हैं:

  • सामाजिक समानता: समाज में जाति, धर्म, लिंग या आर्थिक स्थिति के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।
  • आर्थिक न्याय: देश के संसाधनों और धन का उचित बँटवारा होना चाहिए ताकि गरीबी दूर हो सके।
  • शिक्षा एवं जागरूकता: प्रत्येक नागरिक शिक्षित और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए।
  • सहभागिता: जनतंत्र में हर व्यक्ति की सक्रिय भागीदारी जरूरी है, न कि सिर्फ मतदान करके चुप बैठ जाना।

5. कवि ने जनतंत्र को 'नई फसल' क्यों कहा है ?

कवि ने जनतंत्र की तुलना 'नई फसल' से इसलिए की है क्योंकि जिस प्रकार एक नई फसल पूरी तैयारी, मेहनत और उचित वातावरण के बाद ही पैदा होती है और सबको पोषण देती है, उसी प्रकार सच्चा जनतंत्र भी सामाजिक समानता, शिक्षा और न्याय जैसी उपजाऊ जमीन में ही पनप सकता है और फल-फूल सकता है। यह समाज के लिए नई आशा, नई ऊर्जा और समृद्धि लाने वाला होता है।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

1. 'जनतंत्र का जन्म' कविता के रचयिता हैं-

A. सुमित्रानंदन पंत
B. रामधारी सिंह 'दिनकर'
C. हरिवंशराय बच्चन
D. सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'

उत्तर: B. रामधारी सिंह 'दिनकर'
यह कविता प्रसिद्ध कवि रामधारी सिंह 'दिनकर' द्वारा रचित है, जो अपने ओजस्वी और राष्ट्रवादी काव्य के लिए जाने जाते हैं।

2. कवि के अनुसार जनतंत्र का जन्म कहाँ होगा ?

A. संसद में
B. विधानसभा में
C. गाँव-गली में
D. शहरों में

उत्तर: C. गाँव-गली में
कवि का मत है कि जनतंत्र का वास्तविक जन्म तभी माना जाएगा जब उसकी स्थापना गाँव-गाँव, गली-गली और आम जनता के बीच होगी।

3. 'जनतंत्र का जन्म' कविता में कवि ने जनतंत्र की तुलना किससे की है ?

A. नदी से
B. नई फसल से
C. पहाड़ से
D. सूरज से

उत्तर: B. नई फसल से
कवि ने जनतंत्र को 'नई फसल' के रूपक से समझाया है, जो सबकी सहमति और भागीदारी के रस से पलकर धरती की गोद से उपजती है।

4. कवि के अनुसार सच्चा जनतंत्र कब सफल माना जाएगा ?

A. जब चुनाव हो जाएँ
B. जब सबको मतदान का अधिकार मिल जाए
C. जब सबकी सम्मति से उसकी स्थापना हो
D. जब सरकार बन जाए

उत्तर: C. जब सबकी सम्मति से उसकी स्थापना हो
कवि का स्पष्ट विचार है कि जनतंत्र तभी सार्थक है जब वह हर नागरिक की सहमति और सहयोग से बने, न कि सिर्फ एक औपचारिक व्यवस्था बनकर रह जाए।

5. 'जनतंत्र का जन्म' कविता का मूल संदेश क्या है ?

A. राजनीतिक दलों की महत्ता
B. चुनाव की प्रक्रिया
C. जनता में जागरूकता एवं सहभागिता
D. नेताओं की भूमिका

उत्तर: C. जनता में जागरूकता एवं सहभागिता
इस कविता का केंद्रीय भाव यही है कि जनतंत्र की सफलता के लिए जनता का शिक्षित, जागरूक और सक्रिय होना अत्यंत आवश्यक है। जनतंत्र सिर्फ सरकार चलाने की व्यवस्था नहीं, बल्कि जनता का अपना शासन है।

जनतंत्र का जन्म (पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास)

प्रश्न 1. जनतंत्र का चरित्र कैसा होना चाहिए?

जनतंत्र का चरित्र स्पष्ट, निर्भीक और निष्कपट होना चाहिए। यह ऐसा हो कि जनता के सामने बिना किसी डर या छल-कपट के अपनी बात रख सके। एक आदर्श जनतंत्र में सभी नागरिकों को समान अधिकार और स्वतंत्रता मिलनी चाहिए, जहाँ हर व्यक्ति की आवाज सुनी जाए और उसका सम्मान किया जाए।

प्रश्न 2. कवि ने जनतंत्र के जन्म को किस प्रकार चित्रित किया है?

कवि ने जनतंत्र के जन्म को एक ऐतिहासिक और गौरवशाली घटना के रूप में चित्रित किया है। उन्होंने इसे एक नए युग की शुरुआत बताया है, जो सदियों की गुलामी और शोषण के बाद आया है। यह जन्म जनता की शक्ति, संघर्ष और एकजुटता का परिणाम है, जो अब अपने भाग्य का निर्माता स्वयं बन गई है।

प्रश्न 3. जनतंत्र में नेता का क्या कर्तव्य है?

जनतंत्र में नेता का प्रमुख कर्तव्य जनता की सेवा करना और उनके हितों की रक्षा करना है। उसे जनता के सुख-दुःख को समझना चाहिए और उनकी समस्याओं का समाधान ईमानदारी से खोजना चाहिए। एक सच्चा नेता स्वार्थ से ऊपर उठकर राष्ट्र और समाज के विकास के लिए कार्य करता है।

प्रश्न 4. कवि ने किन पंक्तियों में जनतंत्र के विषय में अपना दृष्टिकोण स्पष्ट किया है?

कवि ने अपना दृष्टिकोण इन पंक्तियों में स्पष्ट किया है:
"जनतंत्र का जन्म हुआ है, आज सदियों के बाद,
गुलामी की जंजीरें तोड़, फेंक दी हैं जनता ने आजाद।"

इन पंक्तियों के माध्यम से कवि कहते हैं कि जनतंत्र का उदय एक लंबे संघर्ष के बाद हुआ है, जहाँ जनता ने गुलामी की बेड़ियाँ तोड़कर स्वतंत्रता प्राप्त की है और अब वह स्वयं अपना शासक है।

प्रश्न 5. जनतंत्र के जन्म से पूर्व समाज की क्या स्थिति थी?

जनतंत्र के जन्म से पूर्व समाज की स्थिति अत्यंत दयनीय और शोषणपूर्ण थी। समाज में गहरी असमानता थी, जहाँ एक ओर शक्तिशाली और धनी वर्ग का वर्चस्व था, तो दूसरी ओर आम जनता गरीबी, अज्ञान और शोषण का शिकार थी। लोगों के पास न तो अधिकार थे और न ही अपनी बात कहने की स्वतंत्रता। वे सदियों से गुलामी की मानसिकता में जी रहे थे।

अतिरिक्त प्रश्न

प्रश्न 1. कवि ने जनतंत्र के जन्म के लिए किन-किन शब्दों का प्रयोग किया है?

कवि ने जनतंत्र के जन्म को व्यक्त करने के लिए अनेक प्रभावशाली शब्दों का प्रयोग किया है, जैसे - "जन्म", "आजादी", "नया युग", "स्वतंत्रता", और "जनता का राज"। ये शब्द जनतंत्र के महत्व और उसके आगमन की खुशी को दर्शाते हैं।

प्रश्न 2. जनतंत्र का जन्म कविता का मूल भाव स्पष्ट कीजिए।

इस कविता का मूल भाव यह है कि जनतंत्र सर्वोत्तम शासन प्रणाली है जो जनता के हाथ में सत्ता सौंपती है। कवि जनतंत्र के आगमन को एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण घटना मानते हैं, जो सदियों के संघर्ष के बाद प्राप्त हुई है। कविता जनता को जागरूक, सतर्क और अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने का संदेश देती है ताकि जनतंत्र सफलतापूर्वक चल सके।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

1. 'जनतंत्र का जन्म' कविता के रचयिता कौन हैं?

A. सुमित्रानंदन पंत
B. रामधारी सिंह दिनकर
C. हरिवंश राय बच्चन
D. सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'

उत्तर: B. रामधारी सिंह दिनकर

2. जनतंत्र का चरित्र कैसा होना चाहिए?

A. कपटपूर्ण
B. भययुक्त
C. निर्भीक और निष्कपट
D. स्वार्थपूर्ण

उत्तर: C. निर्भीक और निष्कपट

3. कवि के अनुसार जनतंत्र में नेता का प्रमुख गुण क्या होना चाहिए?

A. धनवान होना
B. स्वार्थरहित सेवाभाव
C. कठोर स्वभाव
D. चापलूसी करना

उत्तर: B. स्वार्थरहित सेवाभाव

4. जनतंत्र के जन्म से पहले समाज की क्या स्थिति थी?

A. समृद्ध और खुशहाल
B. शोषणपूर्ण और असमान
C. शिक्षित और जागरूक
D. स्वतंत्र और सुरक्षित

उत्तर: B. शोषणपूर्ण और असमान

5. 'जनतंत्र का जन्म' कविता का केंद्रीय भाव क्या है?

A. प्रकृति का सौंदर्य
B. जनतंत्र का महत्व और जनता की शक्ति
C. प्रेम की कहानी
D. ईश्वर की महिमा

उत्तर: B. जनतंत्र का महत्व और जनता की शक्ति

जनतंत्र का जन्म - पद्य खण्ड

प्रश्न 10. फावड़े और हल राजदंड बनने को हैं, धूसरता सोने से श्रृंगार सजाती है। दो राह, समय के रथ का घ॒र्घर-नाद सुनो, सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।

व्याख्या: प्रस्तुत पंक्तियाँ रामधारी सिंह 'दिनकर' की कविता 'जनतंत्र का जन्म' से ली गई हैं। इनमें कवि ने लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति का वर्णन किया है।

पहली पंक्ति का आशय है कि लोकतंत्र में असली राजदंड (शासन का प्रतीक) राजा का राजदंड नहीं, बल्कि किसान का हल और मजदूर का फावड़ा है। ये ही उपकरण देश की संपदा पैदा करते हैं और वास्तविक सत्ता का आधार बनते हैं। 'धूसरता' यानी साधारण मिट्टी भी सोने जैसी कीमती फसल पैदा करके अपना श्रृंगार कर लेती है, यह किसान के श्रम का ही चमत्कार है।

दूसरी पंक्ति में कवि कहता है कि समय का रथ तेजी से बढ़ रहा है और उसके पहियों की घर्घर ध्वनि सुनाई दे रही है। यह परिवर्तन का संकेत है। अब पुराने शासकों के लिए सिंहासन खाली करने का समय आ गया है, क्योंकि सत्ता की असली स्वामी जनता स्वयं सिंहासन पर आरूढ़ होने आ रही है। यह लोकतंत्र के उदय की अटल घोषणा है।


कवि परिचय

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' का जन्म 23 सितंबर, 1908 को बिहार के बेगूसराय जिले के सिमरिया गाँव में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गाँव में हुई। मैट्रिक पास करने के बाद उन्होंने पटना कॉलेज से इतिहास में बी.ए. ऑनर्स किया। उन्होंने शिक्षक, प्राध्यापक और भागलपुर विश्वविद्यालय के उपकुलपति जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। वे राज्यसभा के सदस्य भी रहे।

दिनकर जी एक महान कवि होने के साथ-साथ श्रेष्ठ गद्यकार भी थे। उनकी रचनाओं में राष्ट्रीय चेतना, ओज और मानवीय मूल्यों की अभिव्यक्ति हुई है। उन्हें उनकी महाकाव्य 'उर्वशी' के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार और 'संस्कृति के चार अध्याय' के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ। भारत सरकार ने उन्हें 'पद्मविभूषण' से सम्मानित किया। उनका निधन 24 अप्रैल, 1974 को हुआ।

प्रमुख रचनाएँ:
काव्य: रेणुका, हुंकार, रश्मिरथी, कुरुक्षेत्र, उर्वशी, परशुराम की प्रतीक्षा।
गद्य: संस्कृति के चार अध्याय, अर्धनारीश्वर, मिट्टी की ओर।


पाठ का सारांश

कवि रामधारी सिंह 'दिनकर' की यह कविता 'जनतंत्र का जन्म' स्वतंत्र भारत में लोकतंत्र के उदय का जयघोष है। कवि कहता है कि सदियों की गुलामी के बाद भारत ने स्वतंत्रता पाई है और अब यहाँ जनता का शासन स्थापित हुआ है। अब सोने के ताज वाले राजा नहीं, बल्कि साधारण जन ही सर्वोपरि हैं। वह मूक मूर्ति की तरह नहीं रही, अब उसने अपना मुँह खोल दिया है और हुंकार भर रही है।

कवि बताता है कि लोकतंत्र में असली शक्ति खेतों और खलिहानों में काम करने वाले किसान-मजदूरों में है। उनका हल और फावड़ा ही नए युग का राजदंड है। समय का पहिया तेजी से घूम रहा है और परिवर्तन की इस आवाज के सामने पुराने सिंहासनों को खाली करना ही होगा, क्योंकि अब सत्ता पर काबिज होने के लिए जनता स्वयं आ रही है। यह कविता एक नए, जन-केंद्रित भारत के निर्माण का आह्वान है।


महत्वपूर्ण शब्दार्थ

नाद: ध्वनि, आवाज
गूढ़: गहरा, रहस्यमय
भूडोल: भूकंप, धरती का हिलना
कोपाकुल: क्रोध से व्याकुल
ताज: मुकुट
अब्द: वर्ष, साल
गवाक्ष: बड़ी खिड़की
तिमिर: अंधकार
राजदंड: राज्य करने का अधिकार या उसका प्रतीक (डंडा)
धूसरता: मटमैला या फीका रंग, यहाँ मिट्टी के लिए प्रयुक्त

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